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College news: कॉलेजों में प्राध्यापकों की कमी, जनभागीदारी शिक्षकों की भी नहीं नियुक्ति

पटरी पर नहीं आ पा रही अध्यापन व्यवस्था, भटक रहे विद्यार्थी

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College:  विद्यार्थियों के जान से खिलवाड़, न कॉलेज हुआ वकर्ड, न लगाए बैरियर

College: विद्यार्थियों के जान से खिलवाड़, न कॉलेज हुआ वकर्ड, न लगाए बैरियर

छिंदवाड़ा. शासकीय कॉलेजों में अध्यापन व्यवस्था चरमराई हुई है। प्राध्यापकों ंकी कमी की वजह से विद्यार्थी भटक रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार कॉलेजों को 1 जुलाई से अध्यापन कार्य प्रारंभ करना था, लेकिन कई कॉलेज इस निर्देश की धज्जियां उड़ा रहे हैं। औपचारिकता निभाई जा रही है। दरअसल जिले में 16 शासकीय कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इसमें से अधिकतर में जनभागीदारी से या फिर अतिथि विद्वानों से अध्यापन कार्य कराया जाता रहा है। इस बार भी शासन ने कॉलेजों में अध्यापकों की नियुक्ति नहीं की है। ऐसे में कॉलेजों को फिर से जनभागीदारी शिक्षक एवं अतिथि विद्वानों पर ही निर्भर रहना है। इसके बावजूद भी अब तक कॉलेजों ने जनभागीदारी शिक्षकों को आमंत्रित नहीं किया है। ऐसे में अध्यापन नहीं हो पा रहा है। विद्यार्थी जब कॉलेज प्राचार्य से शिक्षकों को बुलाने की बात कर रहे हैं तो उनसे यही कहा जा रहा है कि जल्द ही प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

गल्र्स कॉलेज में अधिक परेशानी
राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज में 25 से अधिक जनभागीदारी शिक्षकों की नियुक्ति हर वर्ष की जाती है। वहीं 12 से अधिक अतिथि विद्वान हैं। इस कॉलेज में जिन प्राध्यापकों की नियुक्ति है वे भी प्रवेश प्रक्रिया सहित कॉलेज के अन्य कार्य में लगे हुए हैं। ऐसे में छात्राओं की अध्यापन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। दरअसल इस वर्ष गल्र्स कॉलेज में नैक मूल्यांकन की टीम आने वाली है। ऐसे में अधिकतर प्राध्यापकों को उसी तैयारी में लगा दिया गया है। जबकि कॉलेज प्रबंधन को 1 जुलाई को ही जनभागीदारी शिक्षकों को आमंत्रित कर देना चाहिए था। हालांकि पीजी कॉलेज सहित कुछ कॉलेजों में जनभागीदारी शिक्षकों को आमंत्रित किया जा चुका है।

जून में हो गया था दाखिला
उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष एवं स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में दाखिले के लिए प्रथम चरण की प्रक्रिया जून माह में पूरी कर ली थी। जिन विद्यार्थियों को कॉलेज में दाखिला मिल चुका है वे अब पढ़ाई की राह देख रहे हैं। प्रवेश प्रक्रिया निरंतर जारी होने से कॉलेजों में अध्यापन नहीं हो पा रहा है।


इनका कहना है...
कॉलेज प्राचार्य से जनभागीदारी शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर मांग की गई है। अगर प्रबंधन ने जल्द ही ध्यान नहीं दिया तो हम आंदोलन करेंगे।
रेशमा खान, सांसद प्रतिनिधि, गल्र्स कॉलेज