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Company: छिंदवाड़ा से करोड़ों लेकर कम्पनी फरार, क्या था कारोबार पढ़ें यह खबर

एक दूसरे को जोडकऱ व्यापार करने का चलन बड़ी तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन कम्पनी का ही एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।

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Company: छिंदवाड़ा से करोड़ों लेकर कम्पनी फरार, क्या था कारोबार पढ़ें यह खबर

Company: छिंदवाड़ा से करोड़ों लेकर कम्पनी फरार, क्या था कारोबार पढ़ें यह खबर

छिंदवाड़ा. एक दूसरे को जोडकऱ व्यापार करने का चलन बड़ी तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन कम्पनी का ही एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आइजेन कम्यूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी कपड़ा बेचती जिसके लिए वह चेन सिस्टम में लोगों को जोड़ती है जो एजेंड कहलाते हैं। एक व्यक्ति से आइडी बनाकर व्यापार करने के लिए चार हजार रुपए लिए जाते हैं। इस तरह एक दूसरे को जोड़ते हुए काम करते हैं। साथ ही छह माह में रुपए डबल करने का झांसा देकर एजेंटों से निवेश कराया जाता है।

कम्पनी एजेंट के झांसे में आकर जिले के करीब तीन हजार लोगों ने अपनी खून पसीने की कमाई यह सोचकर लगा दी कि छह माह बाद उन्हें दोगुनी रकम मिलेगी। करीब छह से आठ माह तक कुछ निवेशकों को बकायदा कम्पनी ने रुपए भी लौटाए, लेकिन छह माह से रुपए देना बंद कर दिया। निवेशकों ने कम्पनी के अधिकारी और स्थानीय एजेंट भरत चौधरी से चर्चा की तो जवाब मिला कि जीएसटी की दिक्कत होने के कारण अभी रुपए नहीं दिए जा सकते। कम्पनी भोपाल की बताई जा रही है, जिसके अधिकारियों ने अब फोन भी उठाना बंद कर दिया। गुरुवार को कम्पनी में निवेश करने वाले लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत दी। अजाक थाना में भी चार लोगों के खिलाफ शिकायत दी है।

चार से पांच करोड़ का निवेश

पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत देने पहुंचे पवन सूर्यवंशी, ओपी सिंग, ब्रजेश शुक्ला सहित अन्य लोगों का आरोप है, कि भोपाल की कम्पनी ने कुछ सामग्री बेचने के लिए चेन सिस्टम का व्यापार बताया था, जिसमें लोग जुड़े। निवेशकों से आइडी बनाने के चार-चार हजार रुपए लेने के बाद उन्हें अन्य लोगों को जोडकऱ निवेश करने के लिए प्रेरित किया। छह माह में जमा राशि दोगुनी देने का वादा किया था। जिले से लगभग चार से पांच लाख रुपए निवेश किया गया है। कम्पनी के अधिकारियों ने अब फोन उठाना बंद कर दिया। जांच कर उचित कार्रवाई के लिए मांग की गई है।

पांच माह से नहीं हुआ भुगतान

आइजेन कम्यूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी कपड़ा बेचती थी जिसके लिए लोग आइडी बनवाते थे, उसके लिए चार हजार रुपए देते थे। लोगों ने लालच में आकर रुपए जमा किए हैं। कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी की दिक्कत आ रही इसके लिए भुगतान पांच माह से रुका हुआ है। मेरी भी करीब सात आइडी का तीस हजार रुपए नहीं मिला है।

-भरत चौधरी, कम्पनी एजेंट