
नगर निगम ने एक अप्रैल से लागू हो रहे वित्तीय वर्ष 2025-26 से आम आदमी की जेब पर टैक्स का बोझ बढ़ाए जा रहे हैं। निगम की मेयर इन काउंसिल की बैठक में महापौर विक्रम अहके की अध्यक्षता में निर्णय लिया गया कि अब 175 रुपए के स्थान पर 260 रुपए नल जल प्रभार नए सत्र से वसूल किया जाएगा। गौरतलब है कि रीवा, जबलपुर, नर्मदापुरम जैसे निकायों में भी 175 रुपए महीने से अधिक नल जल प्रभार नहीं है, लेकिन छिंदवाड़ा निगम अपनी वित्तीय स्थिति नल जल प्रभार बढ़ाकर सुधारने की तैयारी कर रहा है।
दावा है कि 10 फीसद संपत्तिकर एवं उपभोक्ता जल प्रभार में 50 फीसद से अधिक बढ़ाने के के बाद निगम क्षेत्र का अधिक विकास हो सकेगा। यदि निगम की परिषद भी मेयर इन काउंसिल के इस निर्णय से सहमत हो गई तो नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले करीब 43 हजार परिवारों को निगम से मिल रहे एक समय पानी के लिए अब 175 रुपए के स्थान पर 260 रुपए देना पड़ सकता है। शुक्रवार को नगर निगम के सम्मेलन में बजट की बैठक में शामिल किए जाने वाले उक्त प्रस्ताव में कम से कम दो तिहाई पार्षदों की मंजूरी जरूरी है।
निगम बनने के पूर्व 70 फिर नगर निगम बनने पर लंबे समय तक 150 रुपए जलकर उपभोक्ता प्रभार वसूल करता रहा। करीब दो साल पहले 25 रुपए बढ़ाकर वसूल किया जाने लगा। सिर्फ 2 साल बाद ही अब जलकर उपभोक्ता प्रभार को 50 फीसद बढ़ाने की जरूरत पड़ गई। इसे 85 रुपए बढ़ाकर 260 रुपए करने के प्रस्ताव में एमआईसी की मुहर लग गई। यह प्रभार भी एक तारीख से 15 तारीख तक ही है। इसमें यदि किसी को एक दिन की भी चूक हुई तो विलंब शुल्क 40 रुपए बढ़ जाएगा और 300 रुपए होते देर नहीं लगेगी।
छिंदवाड़ा के समान ही लगभग साढ़े 3 लाख आबादी वाले रीवा शहर में सुबह -शाम दो बार पानी की सप्लाई होती है। यहां भी करीब 47 हजार नलजल उपभोक्ता हैं, लेकिन यहां पर उपभोक्ता प्रभार 175 रुपए ही है। उल्लेखनीय है कि रीवा में रानी तालाब, यूनिवर्सिटी, कुठुलिया सहित तीन फिल्टर प्लांट हैं और पूरे शहर में एक साथ पानी सप्लाई की व्यवस्था है। यहां दोनों समय आधे से एक घंटे तक घरों में पानी पहुंचता है।
करीब 20 साल पहले दो समय पानी की सप्लाई होती थी। आज एक ही समय, वह भी अनियमित पानी की सप्लाई दी जा रही है। जबलपुर में साल के 2040 रुपए (170 रुपए मासिक) नलजल प्रभार लिया जाता है, बड़ा शहर होने के बावजूद कम नलजल प्रभार है। छिंदवाड़ा में बढ़ाना उचित नहीं है।
- आशीष सोनी, शहरवासी
निगम बनने के पहले तो 60 रुपए लिया जाता था, फिर 150 रुपए कर दिया गया था। इसके साथ ही ट्यूबवेल वालों को तो फिल्टर एवं मीठे पानी की सप्लाई नहीं होती है। इसके बावजूद बोर से मिलने वाले पानी के लिए भी ग्रामीण वार्डों एवं कुछ शहर के वार्डों के रहवासियों को देना पड़ता है। यह सीधे जनता के साथ धोखा है।
- असगर वासू अली, पूर्व नेता प्रतिपक्ष निगम
जनता पर नया जल उपभोक्ता प्रभार थोपा जा रहा है। शहरी क्षेत्र के साथ ग्रामीण वार्डों में अभी भी पानी की सप्लाई
ठीक नहीं है। विपक्ष शुक्रवार को होने वाले परिषद की बैठक में इसका प्रबल विरोध करेगी। इसे बढ़ाया जाना उचित नहीं है।
- हंसा दाढ़े, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम
Published on:
27 Mar 2025 05:50 pm
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