19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पीली क्रांति की उम्मीद के साथ विदा हुआ कॉर्न फेस्टिवल

दो दिनी कॉर्न फेस्टिवल का समापन: उत्पादन और व्यापार की अपार सम्भावनाएं बताई वैज्ञानिकों ने

2 min read
Google source verification
Corn festival in chhindwara

Corn festival in chhindwara

छिंदवाड़ा. प्रदेश में मक्का को लेकर अपार सम्भावनाएं हैं। इसके उत्पादन और व्यापार को लेकर गम्भीरता से प्रयास किए जाएं। इसको लेकर पीली क्रांति की अगुआई छिंदवाड़ा कर सकता है। यहां जिस तरह से उत्पादन होता है यह कॉर्न सिटी के रूप में देश में विख्यात हो सकता है। यह बात दो दिवसीय मक्का फेस्टिवल के दूसरे दिन वैज्ञानिकों ने कही। रविवार को फेस्टिवल के दूसरे दिन सुबह ११ बजे से विशेषज्ञों के लेक्चर लगातार चले।
जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय से आए संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. धीरेंद्र खरे ने बताया कि यहां अनुसंधान का काम अच्छा चल रहा है और प्रदेश में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि एक दिन छिंदवाड़ा कॉर्न सिटी के रूप में जाना जाएगा। गुजरात से आए ग्लोबल फूड के सीइओ रामनाथ सूर्यवंशी ने कहा कि व्यापारियों का कम दाम में यदि मक्का यहां से मिलता है तो औद्योगिक प्रतिष्ठान छिंदवाड़ा में अपनी रुचि दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मक्का से तेल भी बनाया जाता हैं जो विदेशों में लोकप्रिय हैं।

इन वैज्ञानिकों ने की चर्चा
प्रथम सत्र में टाटा ट्रस्ट गुजरात द्वारा बिग इंडस्ट्रीज, हरियाणा की कॉटेज इंडस्ट्रीज, भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान पूसा परिसर नई दिल्ली के डॉ.चिकप्पा जी.करजगी द्वारा मक्का उत्पादन के मूल्य संवर्धन, स्वयंसेवी संस्थान मैजी कर्नाटका द्वारा संस्थान की गतिविधियों, कृषि कालेज नागपुर के पूर्व प्रोफेसर डॉ. जीबी देशमुख द्वारा मक्का के भोजन व घास के रूप में उपयोग, जबलपुर के पंकज सिंह द्वारा मक्का संग्रहण, ग्लोबल फूड टेक इंदौर के डॉ.रामनाथ सूर्यवंशी द्वारा मक्का प्रोसेसिंग, एफसीआई भोपाल के डॉ. सतीश द्वारा सीड टेक्नालॉजी और धोली बिहार के प्रमुख अनुसंधानकर्ता प्रोफेसर और तिरहुत कृषि कॉलेज के प्रमुख डॉ.अनिल पांडे बिहार में रबी सीजन में मक्का उत्पादन पर किसानों से चर्चा की। दूसरे सत्र में आनंद कृषि विश्वविद्यालय गोदरा गुजरात के मुख्य मक्का अनुसंधान केन्द्र के मक्का ब्रीडर डॉ.डी.एच.पटेल द्वारा गुजरात में मक्का उत्पादन और पूर्व मक्का ब्रीडर डॉ. एसएन खानोरकर द्वारा बीज उत्पादन (कम्पोजिट्स), वैज्ञानिक डॉ. डी.शोभा द्वारा बेबी कॉर्न व्यंजन, डॉ.मृत्यंजय कुमार द्वारा उच्च तकनीकी से मक्का उत्पादन और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलुपर के डॉ.एस.एस.शुक्ला ने मक्का प्रोसेसिंग के सम्बंध में चर्चा की। छिंदवाड़ा जिले में मक्का के उत्पादान, प्रयोग में लाने वाले बीज और वायुमंडल के बारे में डॉ. वीके पराडकर ने विस्तार से जानकारी दी। प्रश्नोत्तरी के दौरान इन बिंदुओं पर भी चर्चा हुई कि प्रोडक्शन को किस तरह बढ़ाया जाए, किन चीजों को किसान अपनाए, कौन से बीजों का प्रयोग किया जाए।