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दीपावली विशेष : मां महालक्ष्मी को लगाएं इसका भोग, होगी मनोकामना पूर्ण

लाई व बताशा प्राचीन समय में नैवेद्य के रूप में अर्पित किया जाता था
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shri kuber mantra list in hindi

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छिंदवाड़ा . दीपावली के दिन मां महालक्ष्मी को लाई व बताशा का प्रसाद अर्पित किया जाता है। इसके पीछे क्या मान्यता है, यह बहुत कम लोग जानते हैं। दीपावली के पर्व में चाहे दस तरह की मिठाई अर्पित कर दिए जाए, लेकिन जब तक लाई और बताशा नहीं होता, माता का भोग अधूरा माना जाता है। एेसा माना जाता है कि जब मां लक्ष्मी की मनुष्यों ने पूजा की होगी तब लाई और बताशा ही अर्पित किया गया।
ज्योतिषाचार्य शांतनु शास्त्री ने दीपावली में लाई व बताशा के भोग के विषय में बताते हुए कहा कि दीपावली में महालक्ष्मी को प्रसाद स्वरूप लाई व बताशा का भोग लगाने की परम्परा है। इस परम्परा को आज भी लोग पूरा करते हैं, लेकिन इसका क्या कारण है यह बहुत कम लोग ही जानते हंै। मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक धान एवं गन्ने की फसल तैयार हो जाती है। इसलिए धान से बने लाई व गन्ने से बना बतासा बना के मां लक्ष्मी की पूजा में उनको अर्पित करते थे।
आज भी यह परम्परा बनी हुई है। लाई व बताशा प्राचीन समय में नैवेद्य के रूप में अर्पित किया जाता था इसलिए मां लक्ष्मी की पूजा बिना लाई व बताशे के नहीं की जाती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था भी है महत्वपूर्ण कारण

मां लक्ष्मी के प्रसाद में लाई व बताशा अर्पित करने के पीछे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है, चूंकि कृषि कार्य पूर्ण होने के बाद फसल के तैयार होने पर धान से लाई का निर्माण कर महालक्ष्मी को प्रसाद स्वरूप व गन्ने को पहले शक्कर बनाकर बतासा बनाकर नैवेद्य के रूप में अर्पित किया जाता था। बताशा को नैवेद्य का शुद्ध रूप माना जाता था। आज भी यह परम्परा है।

ये हैं व्यावहारिक पहलू

- प्रसाद व नैवेद्य के वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। खोआ या अन्य तरह के मिठाई नहीं हुआ करते थे। नैवेद्य के रूप में बतासा को महत्वपूर्ण माना जाता है।
- प्राचीन काल से ही अपनी फसल अथवा उत्पादन की वस्तुओं को सबसे पहले भगवान को अर्पित करने की परम्परा रही है। यह भी लाई व बतासा को प्रसाद के रूप में अर्पित करने का महत्वपूर्ण कारण है। दीपावली के समय धान की नई फसल आते ही लाई बनाकर अर्पित किया जाने लगा। इसके साथ ही नैवेद्य के रूप में ईख अथवा गन्ना से तैयार बतासा को अर्पित करने के बाद ही खाने की परंपरा रही।
- लाई बतासा हर वर्ग चाहे अमीर हो या गरीब इसे अर्पित करता है। इसके पीछे यह भी कारण है चूंकि हर किसी की आर्थिक स्थिति इतनी ज्यादा अच्छी नहीं होती की वह मिठाई अर्पित कर सके। इसलिए लाई व बताया अर्पित कर वह मां लक्ष्मी को प्रसाद अर्पित कर सकता है।