
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले में स्थित देवगढ़ प्राचीन ऐतिहासिक गोंड राजाओं की शानदार विरासत है, जहां किलों, बावलियों एवं बारहमासी पहाड़ी झरनों से गिरने वाली बूंदों से भरने वाले मोती टांका को देखा जा सकता है।

पहाड़ी पर स्थित मोती टांके में प्राकृतिक रूप से सदैव पानी का उपलब्ध रहना लोगों के लिए सदा से आश्चर्यजनक रहा है। स्थानीय लोग इस तालाब के पानी को पवित्र एवं चमत्कारी मानकर बीमारी में इसका सेवन करते हैं ।

वर्तमान में ऊपर बुर्ज मंदिर स्थापित है जिसे स्थानीय लोग चण्डी देवी का मंदिर कहते हैं। किले की सुरक्षा के उद्देश्य से किले की मजबूत दीवार को जोड़ते हुए 11 बुर्ज और बनाये गए थे। इन बुर्ज से न केवल दूर-दूर तक चारों ओर की चौकसी की जाती थी बल्कि तोप द्वारा शत्रु का सामना भी किया जाता था ।

यह द्वार अब हाथी खाना के नाम से जाना जाता है। वास्तव में यह हाथीखाना में प्रवेश करने का द्वार था। हाथी खाना का मतलब एक विशाल मैदान है, जहां सेना के हाथी रखे जाते थे।

देवगढ़ में ऐसी कई प्राचीन धरोहरें हैं, जिन्हें संरक्षण की दरकार है।

यह स्थान जिले के पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है।