
Dhirendra shastri: आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की इस बात पर लगे ठहाके, कहा-कमरे में बैठ कर कुछ नहीं मिलता
छिंदवाड़ा. बजरंग बली मेरी नाव चली, जरा बल्ली कृपा की लगा देना...ऐसी चौपाइयों के साथ बागेश्वर धाम के प्रमुख आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने रविवार को श्री हनुमंत कथा सुनाई। सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर में आयोजित कथा के दूसरे दिन दूर-दराज से लोग पहुंचे। ऐसा लगा मानो महाकुंभ हो। पंडाल में सुबह 7 बजे से ही लोगों का आने का सिलसिला शुरु हो गया जो शाम तक जारी रहा। लोगों के आने-जाने का क्रम भी लगा रहा। सिवनी, बालाघाट, नागपुर उत्तर प्रदेश सहित अन्य जिलों एवं राज्यों से भारी संख्या में लोग पहुंचे। सुबह 11 बजे तक लिंगा बाइपास से सिमरिया हनुमान मंदिर तक जाम जैसी स्थिति बन गई। आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री ने रविवार को सबसे पहले दिव्य दरबार भी लगाया। एक-एक करके लोगों को बुलाया और उनकी समस्या को सुना और अपनी लिखी पर्ची दिखाई। दोनों का मिलान हुआ और फिर पूरा पंडाल तालियों से कई बार गूंजा। कथा का शुभारंभ उन्होंने गोस्वामी श्री तुलसीदास की चौपाई से की और साथ सभी को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव सम्मान दिवस के उपलक्ष्य में सिमरिया में कथा के लिए आदेश आया तो यह बालक और दास दौड़ा चला आया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का दम है इसलिए तो हम हैं। कहा कि श्वास बिना हम जीवित नहीं रह सकते और श्वास का मतलब होता है पवन और हनुमान जी पवन पुत्र हैं। इसलिए श्री हनुमान की हर जगह जरूरत है।
100 रुपए के लिए छोड़ देते हैं भगवान को
आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि राम जी जैसा प्रेम कोई कर नहीं सकता है। रामजी सबके हैं। उन्होंने कहा कि सूर्य उगता है तो अपने साथ उजाला लाता है, लेकिन सूर्य की रोशनी का फल वही पाता है जो उसके नीचे आता है। कमरा में बैठे-बैठे कुछ नहीं मिल सकता। भगवान की शरण में जो आएगा वह उसकी कृपा का पात्र बन जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें करोड़ों काम छोडकऱ भगवान का नाम लेना चाहिए, लेकिन हमलोग 100 रुपए के लिए भगवान को छोड़ देते है और कहते हैं कि बुढ़ापे में भगवान का पूजन करेंगे। जबकि हमें यह पता नहीं होता कि हम बुढ़ापे तक जिंदा रहेंगे या नहीं।
बच्चे होंगे संस्कारवान
उन्होंने सभी से आव्हान किया कि वे अपने बच्चों को कथा से जोड़े। इससे उनकी जिंदगी की व्यथा मिट जाएगी ओर बच्चे संस्कारवान बन जाएंगे।
भगवान राम की तरह कोई प्रेम नहीं कर सकता
आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि भगवान रामजी जैसा प्रेम कोई नहीं कर सकता। हमलोग संपत्ति के लिए मां-बाप को छोड़ देते हैं, लेकिन धन्य हैं श्रीराम जिन्होंने माता-पिता के लिए संपत्ति त्याग दिया। उन्होंने पंडाल में उपस्थित लोगों से कहा कि भाई का प्रेम देखना है तो राम जी से सीखो। जब रामजी वन में पहुंचे तो वहांवनदेवी प्रकट हुई और उन्होंने भगवान से कहा कि कोई सेवा हो तो बताइए। राम बोल-जिस रास्ते हम चलकर आए हैं वहां कांटे बहुत हैं आप हो सके तो उन्हें हटा लें क्योंकि उस रास्ते मेरा भाई भरत आएगा और जब कांटे उसके पैर में चुभेंगे तो वह दुखी होगा। यही सोचेगा कि मेरी वजह से भैया श्रीराम को इस कांटो पर चलना पड़ा। आचार्य ने कहा कि
रामजी जैसा आदर्श कोई नहीं है। राम परमात्मा हैं। रामजी का चरित्र ही रामचरितमानस है। उन्होंने कहा कि जिस दिन मनुष्य का चरित्र राम की तरह हो जाएगा वह रामचरितमानस हो जाएगा।
अपने से बड़ों का करना चाहिए सम्मान
कथा के दौरान आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री जी ने कहा कि हमें हमेशा बड़ों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि उनके पास अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि श्री हनुमान जी ने भी ब्रम्हा जी के ब्रम्हास्त्र का सम्मान किया था और बंधकर रावण के दरबार में पहुंच गए। उन्होंने एक 12 लडक़ों की कहानी सुनाई। कहा कि सभी ट्रेन में चढ़ गए। फिर कुछ देर बात उन्हें चेन खींचने की बदमाशी सुझी। सभी कहने लगे की जुर्माना कौन देगा। इस पर लडक़ों ने कहा कि हम पैसे मिलाकर दे देंगे। इसके बाद 1200 रुपए इक_े हो गए। फिर सभी लडक़ों ने कहा कि ये पैसे हमें नहीं देने होंगे क्योंकि इस बोगी में हमारे सिवाए एक बुजुर्ग ही बैठा हुआ है। हम आरोप बुजुर्ग पर लगा देंगे। लडक़ों ने चेन खींच दी। पुलिस आई तो वह बुजुर्ग को पकडऩे लगी। बुजुर्ग भी चालाक था। उसने कहा कि लडक़ों ने मेरे जेब से 1200 रुपए लूट लिए और पैसे एक लडक़े के पास है। जब चेकिंग हुई तो बुजुर्ग की बात सही निकली।
दोहा नंबर-19 पर विराम
पं. धीरेन्द्र शास्त्री ने दोहा नंबर-19 पर कथा को विराम दिया। आरती के बाद समापन हुआ। उन्होंने सभी को सोमवार को दोपहर दो बजे कथा सुनने के लिए आने को कहा। उन्होंने कहा कि भविष्य में छिंदवाड़ा में पूरी राम कथा सुनाएंगे।
इधर एक नहीं मिली, तुम्हारी दो-दो
कथा के दौरान दरबार भी लगा। उन्होंने एक-एक करके लोगों को बुलाया और उनकी अर्जी सुनी। सिवनी जिला निवासी बुजुर्ग को पेट की बीमारी से परेशान थे। इस पर पं धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि आप डॉक्टरी सलाह लें। उसी से ठीक हो जाएगा। हालांकि इसके बाद उन्होंने बुजुर्ग की दो पत्नियों का राज खोल दिया। शास्त्री जी ने कहा कि यह जो बीमारी हुई है उसकी वजह तुम्हारी दो-दो पत्नी हंै। पं. शास्त्री ने कहा कि बुढ़ापे में तुम्हारी यह हाल है। यहां एक नहीं मिली, तुम्हारी दो-दो लुगाई। इस पर पूरा पंडाल हंस पड़ा।
Published on:
07 Aug 2023 09:50 pm
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