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जर्जर स्कूल भवनों से खतरे में बचपन

79 स्कूल भवन असुरक्षित, 506 को मरम्मत की दरकार
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छिंदवाड़ा. जिले में ऐसे भी स्कूल हैं, जहां बच्चों को बैठाकर पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे स्कूलों को सर्व शिक्षा अभियान विभाग ने चिह्नित किया है। नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक इन प्रस्तावों को गम्भीरता से नहीं लिया गया। जिले में पांच माध्यमिक शाला समेत 79 प्राथमिक शालाओं के कई कक्ष इतने जर्जर हो चुके हैं कि यहां कक्षाएं लगाई ही नहीं जा सकती।

पीडब्ल्यूडी विभाग ने इन सभी को असुरक्षित घोषित कर प्रमाणपत्र भी जारी किया है। उल्लेखनीय है कि इन 79 स्कूलों के अलावा 506 ऐसे भी स्कूल भवन हैं, जिन्हें मरम्मत की जरूरत है। ये भवन कभी भी स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कई कमरों के असुरक्षित होने की वजह से शिक्षक शेष कमरों में एक साथ कई कक्षाएं लगाकर पढ़ाई करवा रहे हैं। परासिया के एक प्राथमिक स्कूल कोंडराढाना में तो एक भी कमरे सुरक्षित नहीं होने के कारण शिक्षक अपनी गुडविल से पड़ोसी के घर में स्कूल संचालित करवा रहे हैं। शिक्षक एएस उइके ने बताया कि स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों की संख्या अब 27 रह गई है। यह संख्या पूर्व में 40 से ज्यादा थी। प्राथमिक स्तर की सभी कक्षाएं महज दो कमरों में लग रही हैं।

मरम्मत का प्रस्ताव भेजा है
जर्जर भवनों की जगह नए भवनों को बनाने के साथ ही 506 स्कूलों की मरम्मत का प्रस्ताव भेजा गया है। जर्जर भवनों में स्कूल संचालित नहीं हो रहे हैं, उनकी जगह दूसरे भवन अथवा बचे हुए सुरक्षित स्कूल के कमरों का उपयोग किया जा रहा है।
राजू सिंह नायक, सहायक यंत्री सर्व शिक्षा अभियान