
छिंदवाड़ा. कॉलेजों में इस बार दाखिले की स्थिति काफी खराब है। जिले के एकमात्र शासकीय राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज में दो चरण संपन्न होने के बावजूद लगभग 70 प्रतिशत सीट खाली है। यह स्थिति स्नातक में बन रही है। जबकि स्नातकोत्तर में 90 प्रतिशत तक सीट खाली है। जबकि इसके पूरे के वर्ष में कुछ संकाय में दाखिले की होड़ मच जाती थी। लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। वर्तमान में सीएलसी चरण चल रहा है। उम्मीद है कि इस चरण में सीट भर जाएगी। कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश प्रक्रिया का सीएलसी प्रथम चरण 20 जून से प्रारंभ है। सीएलसी चरण हेतु ऑनलाइन पंजीयन 20 जून से 7 जुलाई तक एवं दस्तावेजों का सत्यापन 8 जुलाई तक किया गया। 12 जुलाई को सुबह 11 बजे तक कटऑफ लिस्ट के साथ ही सीट आवंटन पत्र जारी किया जाएगा। 19 जुलाई तक प्रवेश शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके बाद ही विद्यार्थियों का प्रवेश मान्य होगा। 19 जुलाई को ही अपग्रेडेशन का भी विकल्प विद्यार्थी दे सकते हैं।
स्नातकोत्तर में 90 प्रतिशत से अधिक सीट रिक्त
गल्र्स कॉलेज में स्नातकोत्तर की स्थिति और भी खराब है। अधिकतर संकाय में 90 प्रतिशत तक सीट खाली है। द्वितीय चरण के बाद ऐसी स्थिति संभवत: पहली बार बन रही है।
पंजीयन की तिथि समाप्त, अब नहीं मिलेगा मौका
कॉलेजों में स्नातकोत्तर में दाखिले के लिए अंतिम चरण यानी सीएलसी चरण के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीयन की आखिरी तिथि 10 जुलाई थी जो बुधवार को समाप्त हो गई। अब आवेदकों को दाखिला प्रक्रिया में भाग लेने का मौका नहीं मिल पाएगा। जिन्होंने पंजीयन सहित अन्य प्रक्रिया पूरी कर ली है उनके लिए 15 जुलाई को कटऑफ के साथ ही सीट आवंटन पत्र जारी होगा। 15 से 21 जुलाई के बीच विद्यार्थी प्रवेश शुल्क का भुगतान कर दाखिला सुनिश्चित कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष एवं स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में सत्र 2024-25 में दाखिले के लिए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। विभाग ने स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिले की प्रक्रिया 1 मई से 10 जून तक पूरी कराई। वहीं स्नातक द्वितीय चरण की प्रक्रिया 27 मई से 3 जुलाई तक आयोजित हुई। द्वितीय चरण के अंतर्गत 27 मई से 13 जून तक ऑनलाइन पंजीयन, 14 जून तक सत्यापन एवं 19 जून को सीट आवंटन पत्र जारी किया गया था। 27 जून तक प्रवेश शुल्क का भुगतान करना था।
एक किश्त में फीस लेना वजह
शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस बार गल्र्स कॉलेज ही नहीं बल्कि अधिकतर शासकीय कॉलेजों में स्नातक में काफी सीट रिक्त रह गई है। इसके पीछे बड़ी वजह एक किश्त में फीस लेना है। दरअसल जिले में अधिकतर विद्यार्थी गरीब परिवार से हैं। छात्रवृत्ति मिलने में देरी होती है जबकि फीस तत्काल देनी है। इस बार उच्च शिक्षा विभाग के कड़े नियम की वजह से विद्यार्थियों ने कॉलेज में दाखिले से दूरी बना ली है। इसके अलावा 12वीं का रिजल्ट प्रतिशत भी बेहतर नहीं रहा है। वहीं अब काफी संख्या में विद्यार्थी बड़े शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। स्नातकोत्तर में रिक्त सीट की बात करें तो यहां नई शिक्षा नीति की वजह से ही असमंजस है। स्नातक तृतीय वर्ष का रिजल्ट भी जारी नहीं हुआ है।
द्वितीय चरण के बाद स्नातक में रिक्त सीट की स्थिति
संकाय टोटल सीट रिक्त सीट
बीए 1470 976
बीकॉम 220 177
बीकॉम प्लस कम्प्यू. 50 43
बीएचएससी होम साइंस 20 16
बीएससी बायो प्लेन 700 302
बीएससी बायो कम्प्यू. 120 83
बीएससी मैथ 130 96
द्वितीय चरण के बाद स्नातकोत्तर में रिक्त सीट की स्थिति
संकाय टोटल सीट रिक्त सीट
एमए-अर्थशास्त्र 100 96
एमए-अंग्रेजी 120 104
एमए-हिंदी 130 105
एमए-इतिहास 130 115
एमए-राजनीति शास्त्र 130 108
एमए-मनोविज्ञान 90 83
एमए-संस्कृत 100 87
एमए-समाजशास्त्र 130 109
एमएससी-बॉटनी 100 70
एमएससी-जुलॉजी 110 71
एमएससी-मैथ 60 54
एमएससी फिजिक्स 50 47
एमएससी-कमेस्ट्री 80 58
एमएससी-होमसाइंस-एफडी 20 20
एमएससी-होमसाइंस-एचडी 20 20
एमकॉम 150 143
पीजीडीसीए 130 109
इनका कहना है…
सीएलसी चरण चल रहा है। अक्सर देखा जाता है कि आखिरी समय में काफी संख्या में विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। कुछ अन्य वजह भी हो सकती है।
डॉ. महिम चतुर्वेदी, दाखिला प्रभारी, गल्र्स कॉलेज
Published on:
11 Jul 2024 12:50 pm
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