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मृगबहार संतरे के भी नहीं मिल रहे पूरे दाम

संतरा उत्पादक किसानों को लगातार दूसरे सीजन में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंबिया बहार के बाद मृगबाहर में दाम नहीं मिलने से चेहरों पर मायूसी छाई है। क्षेत्र में मृग बहार की बंपर पैदावार हुई है पर पूरे दाम नहीं मिलने से किसानों की मेहनत भी नहीं निकल पा रही है। इस पर बेमौसम बारिश ने परेशानी और बढ़ा दी है।
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Even Mrigbahar oranges are not getting full price

छिंदवाड़ा/पांढुर्ना. संतरा उत्पादक किसानों को लगातार दूसरे सीजन में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंबिया बहार के बाद मृगबाहर में दाम नहीं मिलने से चेहरों पर मायूसी छाई है। क्षेत्र में मृग बहार की बंपर पैदावार हुई है पर पूरे दाम नहीं मिलने से किसानों की मेहनत भी नहीं निकल पा रही है। इस पर बेमौसम बारिश ने परेशानी और बढ़ा दी है। तेज हवा चलने से संतरा फ लों को नुकसान का मुंह देखना पड़ सकता है। अभी बागानों में मृग बहार संतरा लहलहा रहा है। अच्छी फसल हुई है। व्यापारी 18 से 20 व 22 रुपए किलो का ही भाव दे रहे हैं। दाम कम होने की वजह से कई किसानों ने आंबिया में फसल नहीं बेची थी। अब फि र से दाम कम मिलने से किसान चिन्तित हैं। व्यापारी और किसान वैभव जैन ने बताया कि देशावर मंडियों में पांढुर्ना के संतरे के लिए कई चुनौतियां है। ज्यादा पैदावार के साथ ही राजस्थान का संतरा भी बाजार में उतर गया है। किन्नू और अन्य फलों के कम दाम से भी संतरे को भाव नहीं मिल रहे है। अच्छी संतरे को कम से कम 1500 रुपए क्रेट के हिसाब से दाम मिलने चाहिए। छोटे फल को 500 रुपए तो अच्छी किस्म को सिर्फ 1200 रुपए तक दाम दिए जा रहे है। पहले कोलकाता, गोरखपुर, बनारस, दिल्ली आदि जगहों से बांग्लादेश और अन्य देशों में संतरे का निर्यात किया जाता था। बांग्लादेश सबसे बड़ा निर्यातक है, पिछले दो वर्षों से निर्यात पर ड्यूटी शुल्क बढ़ाने से वहां के भी दरवाजे लगभग बंद हो गए हैं। इस समस्या का आज तक केन्द्र सरकार हल नहीं निकाल सकी है। इससे पूरे देश के किसानों को नुकसान भुगतना पड़ रहा है। आज संतरांचल के किसानों के पास दूसरा विकल्प नहीं है। अंबिया में फसल नहीं बेचकर नुकसान उठा चुके किसानों के पास इस सीजन में कम दामों में संतरा बेचना मजबूरी बन चुकी है। सरकार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही।