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किसान ने किए कई आविष्कार, वैज्ञानिकों ने माना लोहा

कृषि यंत्र रिज फरो अटैचमेंट सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल के लिए तैयार किया गया है। इसकी डिजाइन में मिट्ठनलाल चौरसिया ने ऐसा परिवर्तन किया, जिससे यह यंत्र और भी कारगर हो गया। इनकी डिजाइन का जिले के कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव में किसान और वैज्ञानिकों की मौजूदगी में अवलोकन किया गया और वैज्ञानिकों ने सोयाबीन की खेती के लिए इसे वरदान बताया।

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mithilesh dubey

Apr 09, 2016

chhindwara

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छिंदवाड़ा. कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है। इसे चरितार्थ किया चौरई के कुंडा निवासी किसान मिट्ठनलाल चौरसिया ने। उन्होंने खेती के लिए कई ऐसे यंत्र तैयार किए, जिसका लोहा वैज्ञानिकों ने भी माना है। वे 50 एकड़ में खेती करने वाले किसान हैं और खेती में प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।
कृषि यंत्र रिज फरो अटैचमेंट सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल के लिए तैयार किया गया है। इसकी डिजाइन में मिट्ठनलाल चौरसिया ने ऐसा परिवर्तन किया, जिससे यह यंत्र और भी कारगर हो गया। इनकी डिजाइन का जिले के कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव में किसान और वैज्ञानिकों की मौजूदगी में अवलोकन किया गया और वैज्ञानिकों ने सोयाबीन की खेती के लिए इसे वरदान बताया। चौरसिया ने यंत्र में जो परिवर्तन किया, उससे सोयाबीन फसल जमीन से कुछ ऊपर रहेगी। भारी बारिश के बाद भी वह खराब नहीं होगी और खेत को गोंदरा से भी छुटकारा मिलेगा। केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान ने इसके लिए चौरसिया की सराहना की व रिज फरो अटैचमेंट में विशेष योगदान के लिए 2016 में प्रशस्ति-पत्र दिया। कृषि अभियांत्रिकी संभाग जबलपुर ने उनसे नई डिजाइन से रिज फरो अटैचमेंट यंत्र बनाने को कहा है।

अन्य को भी स्वीकृति

मिट्ठनलाल ने 2005 में पानी की टंकी को छलकने से रोकने वाले यंत्र और आधुनिक बैलगाड़ी का भी निर्माण किया, जिसे गुजरात और आंध्र प्रदेश द्वारा मान्यता भी दी गई। इनकी उन्नत बैलगाड़ी में क्षेत्रफल दोगुना कर दिया गया, जिससे गाड़ी पलटने की आशंका कम रहती है।

खरपतवार और मोथा को किया नियंत्रित

मिट्ठनलाल बताते हैं कि वे खेतों में खरपतवार और मोथा से बहुत परेशान थे। तमाम कोशिशों के बावजूद मोथा से छुटकारा नहीं मिल रहा था। इससे परेशान होकर उन्होंने एक ऐसे यंंत्र का निर्माण किया, जो ट्रैक्टर में प्लाऊ के साथ लगा दिया जाता है। ये मोथा और खरपतवार को जड़ से उखाड़ देता है, जिससे खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ जाती है। 63 वर्षीय चौरसिया ने वर्ष 1974 में बीकॉम किया और नैाकरी करने की बजाय खेती को लाभ का धंधा बनाया।

बैलचलित बक्खर सह बोवनी यंत्र

2002 में मिट्ठनलाल ने एक ऐेसे यंत्र का निर्माण किया था, जिससे बोवनी और बखरानी साथ की जा सकती है। इससे किसानों का समय व पैसे भी बचे। इस यंत्र को 2002 फरवरी में दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे कृषि मेले में प्रदर्शित किया गया। इसका फायदा यह भी है कि इससे सोयाबीन बुवाई के बाद और पहले निंदाई की जरूरत नहीं पड़ती और खरपतवार भी नष्ट हो जाती है। इस यंत्र की लम्बाई पांच फीट है। इससे एक दिन में पांच एकड़ खरपतवार नष्ट हो जाती है। इस यंत्र के लिए चौरसिया को 2002 में ही कृषि अभियांत्रिकी संभाग जबलपुर द्वारा पुरस्कृत किया गया।

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