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फोन कर बुलाया, फिर पेट फाड़ा और गुप्तांग काटकर पौधे पर टांगा, 7 साल बाद प्रेमिका और उसके पति समेत 4 को उम्रकैद

Bihar News: रोहतास जिले के भगवानपुर गांव में मन्नू कुमार की हत्या के लगभग सात साल बाद आखिरकार इंसाफ मिल गया है। बुधवार को जिला जज अनिल कुमार की अदालत ने मृतक की गर्लफ्रेंड, उसके पति, पिता और भाई को उम्रकैद की सज़ा सुनाई।

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 21, 2026

Bihar News: बिहार के रोहतास जिले में सात साल पुराने एक क्रूर मर्डर केस में बुधवार को आखिरकार फैसला सुनाया गया। जिला जज IV अनिल कुमार की कोर्ट ने मन्नू कुमार मर्डर केस में चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई और उन पर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा पाने वालों में मृतक की गर्लफ्रेंड, उसका पति, उसका भाई और उसके पिता शामिल हैं। कोर्ट ने इसे क्रूर और सोची-समझी हत्या मानते हुए अधिकतम सजा सुनाई।

फोन कर बुलाया, फिर रची हत्या की साजिश

यह घटना 4 मार्च, 2019 को हुई थी। जांच और गवाहियों से पता चला कि घटना की शाम मन्नू कुमार को उसकी गर्लफ्रेंड सुमन देवी उर्फ ​​चुमन देवी ने बुलाया था। मन्नू बिना किसी को बताए घर से निकल गया और वापस नहीं लौटा। अगले दिन 5 मार्च को गांव वालों को उसका शव सरसों के खेत में मिला। मृतक के पिता अशोक चौधरी ने अगरेर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी।

गुप्तांग काट कर पौधे पर लटकाया

पुलिस और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, मन्नू का पेट चाकू से चीर दिया गया था और हत्या के बाद उसके प्राइवेट पार्ट्स काटकर सरसों के पौधे पर लटका दिए गए थे। उस समय इस घटना से पूरे इलाके में सदमा और गुस्सा फैल गया था।

इज्जत के नाम पर साजिश

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि हत्या सिर्फ गर्लफ्रेंड ने अकेले नहीं की थी, बल्कि अपने पति प्रभाकर सिंह उर्फ ​​प्रकाश चौधरी, पिता दुधेश्वर चौधरी और भाई फूलचंद के साथ मिलकर की थी। ट्रायल के दौरान नौ गवाहों ने गवाही दी। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि प्रेम प्रसंग खत्म करने के लिए मन्नू को पहले बंदी बनाया गया था और गांव में पंचायती भी हुई थी, लेकिन गर्लफ्रेंड ने उससे मिलना बंद नहीं किया। इसके बाद, पूरे परिवार ने मन्नू को खत्म करने का फैसला किया।

पंचायत के बाद भी मिलते रहे, फिर हत्या हुई

कोर्ट में यह भी सामने आया कि हत्या से ठीक दो दिन पहले, गर्लफ्रेंड सुमन अपने पति प्रभाकर के साथ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से अपने माता-पिता के गांव भगवानपुर आई थी। घर लौटने के बाद, एक प्लान बनाया गया और पीड़ित को फोन करके बाहर बुलाया गया और उसका मर्डर कर दिया गया। प्रॉसिक्यूशन ने इसे ऑनर किलिंग और सोची-समझी साजिश का कॉम्बिनेशन बताया।

सात साल बाद आया फैसला

घटना के बाद से, गांव वाले और पीड़ित का परिवार न्याय के लिए लड़ रहे थे। ट्रायल में देरी गवाहों की उपलब्धता, फोरेंसिक जांच और खुद ट्रायल प्रोसेस की वजह से हुई। बुधवार को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन ने आरोपों को बिना किसी शक के साबित कर दिया है। एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अनिल कुमार सिंह ने कहा कि कोर्ट ने माना कि मर्डर का तरीका बहुत क्रूर था और इससे समाज में डर, असुरक्षा और अमानवीयता फैली। इसलिए, अधिकतम सजा सही थी।