5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Farmers are worried: कृषि उपज मंडी कुसमेली में किसानों पर दो तरफा मार

- शेड में रखा व्यापारियों का स्टॉक - खुले में लगाई ढेरी तो औने-पौने दाम की लग रही बोली

2 min read
Google source verification
Krishi Upaj Mandi Kusmeli

खुले में रखीं किसानों की बोरियां।

Krishi Upaj Mandi Kusmeli में किसान शेड तो बने हुए हैं, लेकिन इनमें किसानों की जगह ज्यादातर व्यापारियों की ही उपज स्टॉक रहती है। इस कारण किसानों को अभी भी खुले में ही अपनी उपज ढेर करनी पड़ रही है, जिसका नुकसान किसानों को दो तरफा हो रहा है। पहला तो व्यापारी संघ के नए नियम के कारण व्यापारी, किसान की उपज की नीलामी में भाग लेने से बचते हैं और यदि नीलामी में शामिल होते भी हैं तो बाजार से काफी कम दरों पर उपज खरीद रहे हैं। वहीं खुले में रखी गई किसान की उपज भीग गई तो सामान्य तौल की तुलना में कम से कम एक किलो अधिक उपज तौलकर व्यापारी को देना पड़ता है। और तो और यदि खुले में रखी गई उपज को व्यापारी की दुकान तक भिजवाना हो तो इसके लिए किसान को मंडी के अंदर ही 10 रुपए बोरी अतिरिक्त खर्च करना पड़ जाता है।

प्रांगण प्रभारी नहीं निभा रहे अपनी ड्यूटी

मंडी में प्रांगण प्रभारी पर व्यवस्था बनाने की जवाबदेही होती है। शेड में व्यापारियों की स्टॉक उपज को हटवाने से लेकर किसानों को जगह दिलवाने की जिम्मेदारी इन्हीं पर रहती है, लेकिन प्रांगण प्रभारी अपनी जवाबदेही के प्रति गंभीर नहीं हैं। मंडी प्रबंधन भी इसके लिए कोई कार्रवाई नहीं करता है। अनाज तौल के बाद मंडी प्रबंधन पर यह जिम्मेदारी है कि उपज को शेड से 24 घंटे में हटवाना चाहिए, लेकिन वहां से उपज हटवाने की जगह व्यापारी अपनी छल्लियों को अच्छी तरह शेड में ही ढंक कर रख देते हैं। शेड क्रमांक चार में मौजूद एक हम्माल ने बताया कि शेड के अंदर भी तिरपाल से ढंकी बोरिया कई दिनों से रखी हैं और यह व्यापारियों की बोरियां हैं।

कम मात्रा वाली उपज को भी नहीं मिल रही जगह

मंडी के सात शेडों में मार्च से शेड क्रमांक 2, 3, 5, 6 एवं 7 गेहूं की उपज के लिए आरक्षित है। शेड क्रमांक 4 को मक्का की उपज के लिए रखा गया है, जबकि शेड क्रमांक एक का उपयोग सोयाबीन, चना, मूंग, उड़द, आमचूर लाने वाले किसान कर सकते हैं। लेकिन, शेड क्रमांक एक और चार में व्यापारियों की हजारों बोरियां स्टॉक हैं। इन बोरियों को तो व्यापारी हटा नहीं रहे हैं, इसके उलट नए नियम के कारण खुले में ढेर के उपज की बोली औने-पौने दाम में लगा रहे हैं। दो दिनों में करीब आधा दर्जन किसानों ने इस बात का विरोध भी किया है, इनमें से कुछ किसान अपनी उपज को वापस बोरियों में भरवाकर घर भी ले गए हैं।

इनका कहना है

मंडी में मूंग के लिए शेड क्रमांक एक में जगह नहीं मिली तो अन्य किसानों के साथ खुले मैदान पर ही हमने अपनी मूंग ढेर कर दी। जब शेड के बाद व्यापारी यहां नीलामी के लिए पहुंचे तो बाजार दर से काफी कम दामों में बोली लगाए, जिसे हमने बेचा नहीं। मूंग को दोबारा बोरियों में भरवाकर वाहन से वापस ले जा रहे हैं। शेड से व्यापारियों की बोरियां उठी नहीं हैं।
अजय साहू, किसान

उड़द लेकर मंडी पहुंचे तो निर्धारित शेड में जगह नहीं मिली, जिसके कारण बाहर ही ढेर करना पड़ा। बारिश न हो जाए इसलिए घबराहट भी हो रही थी। खरीदार उपज के ढेर के पास पहुंचे तो बाजार दर से 100-200 रुपए प्रति क्विंटल कम ही भाव में लिए। वापस ले जाते तो प्रति क्विंटल इतना खर्च लग जाता, इसलिए बेच दिए। शेड में व्यापारियों की बोरियां स्टॉक हैं।
संतोष साहू, किसान

जल्द विजिट करूंगा
मंडी का विजिट जल्द करूंगा। सचिव से चर्चा कर किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा।
सुधीर जैन एसडीएम, भारसाधक अधिकारी मंडी