
मंतोष कुमार सिंह
छिंदवाड़ा. तामिया तहसील की ग्राम पंचायत जोगीमुआर के किसान किस्मत की खेती कर रहे हैं। यहां न तो सिंचाई की सुविधा है, न ही जमीन उपजाऊ है। मौसम ने साथ दिया तो अन्न का दाना नसीब हो जाता है, नहीं तो अगली फसल के लिए फिर मेहनत शुरू कर दी जाती है। जोगीमुआर की आबादी कृषि पर निर्भर है। यहां के निवासियों की आय का जरिया कृषि और मजदूरी है। खेती भगवान भरोसे होती है, क्योंकि जमीन खेती के योग्य नहीं है।
मावठा के भरोसे रबी की फसल
जमीन पथरीली होने की वजह से चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। खरीफ के समय मक्का, तुवर, ज्वार और कुटकी की बोवनी होती है। बरसात की वजह से फसल तैयार हो जाती है। रबी की फसल उगाने के समय विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। नदी, नाले और कुएं सूख जाने से सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो जाती है। मावठा गिरा तो फसल तैयार हो जाती है। घर के आंगन में गेहूं, चना और मटर के दर्शन हो जाते हैं।
कुआं भी नहीं देता साथ
किसान कैलाश धुर्वे के परिवार में छह लोग हैं। 15 एकड़ में खेती करने के बाद भी परिवार का पेट भरना मुश्किल हो जाता है। जमीन पथरीली है। कुआं भी सूख जाता है। समय पर सिंचाई न होने से उत्पादन प्रभावित होता है। रबी की फसल भगवान भरोसे है। बारिश हुई तो उपज हो जाती है, नहीं तो फसल सूख जाती है। कैलाश ने बताया कि सहकारी समिति छिंदी से खाद और बीज उधारी में मिल जाता है। जरूरत पडऩे बिना ब्याज के कुछ पैसे भी मिल जाते हैं।
पथरीली जमीन में गेहूं की खेती
किसान सोबिंद उईके ने चार एकड़ कृषि भूमि ठेके पर ली है। उन्होंने हल बैल से पत्थर का सीना चीर कर गेहूं की फसल लगाई है। सोबिंद का कहना है कि खेती के लिए दिन रात पसीना बहाना पड़ता है। जमीन पथरीली होने की वजह से बखर (खेत की जुताई) में परेशानी का सामना करना पड़ता है। सिंचाई की सुविधा नहीं है। खेती बरसाती नदी बड़ादेव पर निर्भर है। नदी में थोड़ा सा पानी बचा है। कुछ दिनों में नदी सूख जाएगी। मौसम ने साथ दिया तो परिवार का पेट भरने के लिए अनाज निकल जाएगा, नहीं तो मजदूरी करने बरेली और पिपरिया चले जाएंगे।
Published on:
12 Dec 2022 07:33 pm
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