
छिंदवाड़ा.कृषि विभाग के क्रांतिकारी प्रयोगों से बिगड़ती मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ है। हैप्पी सीडर से फसल प्रबंधन करने से नरवाई जलाने की घटनाएं कम हुई है वहीं रबी सीजन में 5 हजार हैक्टेयर क्षेत्र पर सीधी बोवाई संभव हुई है। अब आगे केवल प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने और ज्यादा यूरिया का उपयोग करने वाले किसानों को कंट्रोल करने की जरूरत है। विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर हर किसान को सेहतमंद अनाज और सब्जियां उत्पन्न करने इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना होगा।
देखा जाए तो छिंदवाड़ा और पांढुर्ना जिले में करीब 5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में इस समय फसल और सब्जियां हो रही है। जिनसे 3 लाख किसान जुड़े हैं। पिछले दो साल के खरीफ और रबी सीजन में खेती के उनके तरीकों को सुधारा गया है। इससे कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है वहीं किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है। कृषि विभाग की जानकारी के मुताबिक जिले में लगभग 100 सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर से 30 ग्रामों में लगभग 5 हजार एकड़ में मक्का /धान के बाद चना, सरसों एवं गेहूं की बिना नरवाई में आग लगाकर सीधे बोवनी की गई है । इससे मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने की दिशा में मदद मिलेगी।
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1.नरवाई जलाने की घटनाएं कम
प्रदेश की सेटेलाइट रिपोर्ट में पिछले दो साल में छिंदवाड़ा-पांढुर्ना जिले में नरवाई जलाने की घटनाएं 143 दर्ज हुई थी। इस वर्ष 2024 में हैप्पी सीडर से सीधी बोवाई होने से इन घटनाओं में कमी आई। ये इस वर्ष 34 रही। मिट्टी में ही नरवाई अवशेष हैप्पीसीडर से मिलने से खाद की समस्या भी हल हुई है।
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2.प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिला
जिले के तामिया, जुन्नारदेव, अमरवाड़ा, बिछुआ समेत कुछ इलाकों के आदिवासी किसान सदियों से कोदो-कुटकी, रांगी का उत्पादन गोबर खाद से करते आ रहे हैं। इस वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार ने इसे प्रोत्साहन दिया। प्राकृतिक खेती का औसत करीब 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में हो गया है।
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3.यूरिया का संतुलित उपयोग जरूरी
इस समय किसानों का एक वर्ग गेहूं की फसल में एक एकड़ में ज्यादा मात्रा में सात-आठ बोरी यूरिया का उपयोग करने लगा है। इसका कहीं न कहीं घातक प्रभाव मानव जीवन पर पड़ेगा। कृषि विभाग अब ऐसे किसानों को संतुलित खाद का उपयोग करने की जरूरत पर बल दे रहा है। जिससे आम आदमी को बेहतर और सेहतमंद अनाज मिल सकें।
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इनका कहना है…
किसानों को खेतों में नरवाई/ पराली न जलाने और ना ही जलाने देने का संकल्प लेना होगा। साथ ही प्राकृतिक खेती और यूरिया के संतुलित उपयोग पर ध्यान देना होगा, तभी हम मिट्टी का स्वास्थ्य सुधार पाएंगे।
-जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि।
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Published on:
06 Dec 2024 12:21 pm
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