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Festival : काल भैरव जयंती 19 को, यह करें जतन

मंदिर परिसर में होगी कालभैरव प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा

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Kaal Bhairav

Kaal Bhairav

17 से 19 नवंबर तक होगा आयोजन
छिंदवाड़ा/ सिद्धेश्वर काल भैरव समिति जिला अस्पताल के सामने पशु चिकित्सा विभाग कार्यालय परिसर स्थित मंदिर मेंं सिद्धेश्वर काल भैरव भगवान की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करेगी।
इसका समारोह 17 से 19 नवंबर तक किया जा रहा है। इस अवसर पर मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा, ध्वजा पर कलश स्थापित किया जाएगा। काल भैरव को सवा किलो चांदी का छत्र भी चढ़ाया जाएगा। 19 नवंबर को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के साथ भंडारा भी होगा।
पहले दिन 17 नवंबर को सिद्धेश्वर काल भैरव की शोभायात्रा निकाली जाएगी पशु चिकित्सालय प्रांगण से फव्वारा चौक, गणेश चौक, छोटी बाजार बड़ी माता मंदिर होते हुए बरारीपुरा से पोला ग्राउंड के रास्ते महोत्सव स्थल पहुंचेगी।

भैरव जयंती पर होगा भंडारा

छोटा तालाब के पास स्थित ओम शिवकाल भैरव बजरंग मंदिर में 19 नवंबर को काल भैरव जयंती मनाई जाएगी। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि सुबह विधिवत पूजा-अर्चना का कार्यक्रम होगा। इसके बाद यहां भंडारा होगा। हर साल की तरह इस बार भी जयंती कार्यक्रम की तैयारियां की जा रहीं हंै। भंडारा दोपहर दो बजे से शुरू होगा।

यह भी जानें

हर वर्ष मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव की जयंती मनाई जाती है। इस भैरवाष्टमी भी कहा जाता है। बता दें कि भगवान काल भैरव तंत्र विद्या के देवता भी माने जाते हैं और यही कारण हैं कि तांत्रिक इनकी उपासना करते हैं। मान्यता के अनुसार इनकी उपासना रात्रि में की जाती है। रात्रि जागरण कर भगवान शिव, माता पार्वती एवं भगवान कालभैरव की पूजा का महत्व है। काल भैरव के वाहन काले कुत्ते की भी पूजा होती है। कुत्ते को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। पूजा के समय काल भैरव की कथा भी सुनी या पढ़ी जाती है। ओम कालभैरवाय नम:, ओम भयहरणं च भैरव:, ओम भ्रां कालभैरवाय फट् आदि मंत्र का जाप भी किया जाता है। मान्यता है कि भैरव की पूजा करने वाला निर्भय हो जाता है। उसे किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं होती। उसके समस्त कष्ट बाबा भैरव हर लेते हैं।
इस बार 19 नवंबर को काल भैरव जयंती है। अष्टमी तिथि दोपहर 3. 45 बजे शुरू होगी और अगले दिन दोपहर 1.41 बजे यानी 20 नवंबर को समाप्त होगी।