
गर्मी की शुरुआत के साथ ही प्रदेश भर में आग लगने की घटनाएं बढऩे लगी हैं। सभी जगह अग्निशमन विभाग के पास प्रतिदिन आग लगने की सूचनाएं आ रही हैं। आग को नियंत्रित करने के लिए कर्मचारी दिन रात दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर जिलों में संसाधनों की कमी की वजह से आग बुझाने में पसीना बहाना पड़ रहा है। बीच रास्ते में ही कंडम वाहनों की सांसें फूल रही हैं। किसी भी जिले को जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुसार फायर वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। छिंदवाड़ा इसका साक्षात उदाहरण है, जहां नगर निगम के पास केवल चार फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां हैं। एक फायर वाहन पहले से खराब पड़ा हुआ है, दूसरे को सामूहिक विवाह की उपहार सामग्री की सुरक्षा में लगाया गया है। बाकी बचे दो वाहनों के भरोसे 100 किलोमीटर का क्षेत्रफल और लाखों की आबादी है। 30 कर्मचारियों का अमला आग बुझाने में लगा हुआ है।
हर महीने आग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जनवरी में 19 मामले सामने आए थे, जो फरवरी में बढक़र 28 हो गए। मार्च में अग्नि दुर्घटनाओं की 37 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सिवनी जिले में भी आगजनी की घटनाओं को रोकने की व्यवस्था भगवान भरोसे है। जिले भर में मात्र आठ फायर ब्रिगेड वाहनों के भरोसे 1579 गांवों की सुरक्षा है। केवलारी और घंसौर विकासखंड में एक भी फायर वाहन नहीं हैं। यहां आग लगने पर दूसरी जगहों से फायर ब्रिगेड बुलाया जाता है। इस कारण वाहनों के समय पर घटनास्थल पर पहुंचने के आसार नहीं रहते। यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में दुर्घटनाओं में भारी नुकसान हो जाता है। यह हर साल की कहानी है। सरकार को इसे प्राथमिकता से देखना चाहिए। उसे अपने निकायों को साधन सुविधा संपन्न करना चाहिए। उनका अभाव दूर करना चाहिए। उन्हें पर्याप्त वित्तीय मदद भी दी जाए, ताकि वे जरूरत के हिसाब से फायर वाहन खरीद सकें और अपने बेकार फायर वाहनों को सुधरवा सकें।
एक उपाय सरकार को फसलों के संदर्भ में किसानों से बातचीत के रूप में भी करना चाहिए। अभी अधिकांश घटनाएं फसलों के कारण ही हैं। खेतों में गेहूं, सरसों और अन्य फसलें तैयार हैं, जो थोड़ी सी असावधानी में अग्निकांड का रूप ले रही हैं। किसानों को नरवाई जलाने से भी पुख्तगी से रोकना होगा, क्योंकि ये भी फसलों में आग का बड़ा कारण है।
Published on:
31 Mar 2023 07:43 pm
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