
स्थापना दिवस: कभी नागपुर होती थी हमारी राजधानी
छिंदवाड़ा/एक जमाना था जब छिंदवाड़ा सीपी एंड बरार प्रांत का हिस्सा था। जिसकी राजधानी नागपुर हुआ थी। तब हर छोटे-बड़े प्रशासनिक कामकाज के लिए संतरा नगरी की दौड़ लगानी पड़ती थी। राज्य पुर्नगठन आयोग द्वारा जब मप्र का गठन किया गया तो छिंदवाड़ा को जोड़ दिया गया। यहीं वजह हैं कि इस जिले की लोक संस्कृति में गोंड और मराठा साम्राज्य की छाप दिखती है। मप्र स्थापना दिवस के मौके पर किसी बुजुर्ग के पास बैठो तो यादों की ये धुंधली तस्वीर फिर ताजा हो उठती है। इन 63 साल के सफर में छिंदवाड़ा प्रगति पथ पर अग्रसर है और एक राजनीतिक ताकत भी बन गया है।
बुजुर्गो की जुबानी सुनें तो जहां छिंदवाड़ा का नाम आता है तो इतिहास के पन्नों पर सबसे पहले देवगढ़ का जिक्र आता है। गोंडवाना राजवंश के शासकों ने लम्बे समय पर शासन किया। दे$वगढ़ के किले के भग्नावशेष मौजूद है। गोंड राजाओं की सत्ता कालांतर में मराठा और अंग्रेजों के हाथों में चली गई। वर्ष 1947 में देश स्वतंत्र हुआ तो छिंदवाड़ा को मध्य भारत के राज्य सीपी एंड बरार प्रांत का हिस्सा बना दिया गया। इसकी राजधानी नागपुर से ही हर प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां चलती रही। एक नवम्बर 1956 को जब मप्र बनाया गया तो छिंदवाड़ा इस राज्य का हिस्सा बना और भोपाल राजधानी बनी। करीब 11,815 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले जिले ने शिक्षा,कृषि,कोयला,खनिज,स्वास्थ्य समेत हर क्षेत्र में तरक्की की है। अगले पांच साल में कन्हान कॉम्प्लेक्स,मेडिकल कॉलेज,विश्वविद्यालय,कृषि कॉलेज, केन्द्रीय जेल समेत अन्य विकास के सोपान से जिले की तस्वीर कुछ अलग होगी।
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निवेश से 22 लाख की आबादी का जिला
छिंदवाड़ा जिले में बढ़ते निवेश से आबादी भी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में आबादी का औसत करीब 22 लाख है। दो साल बाद 2021 की जनगणना में इसके वास्तविक आंकड़े दिखाई देंगे। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक छिंदवाड़ा जिले की जनसंख्या मप्र की कुल आबादी का 2.88 प्रतिशत है। जनसंख्या घनत्व 177 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी और औसत साक्षरता दर 72.21 थी। इसका औसत पहले की अपेक्षा कई गुना ज्यादा बढ़ गया है।
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38 प्रतिशत आदिवासी,मराठा संस्कृति की छाप
समाजसेवी विजय सिंह कुसरे का कहना है कि जिले की आबादी में 38 फीसदी हिस्सेदारी आदिवासी है। गोंडवाना साम्राज्य के लम्बे समय तक सत्ता में काबिज होने से इस वर्ग का दबदबा रहा। मराठा राजाओं के शासन के चलते भी इसकी लोक संस्कृति पर महाराष्ट्रीयन छाप रही। इसके अलावा यूपी,बिहार,तमिलनाडृू,आंध्र समेत हर राज्य के लोग कोयला समेत अन्य नौकरियों में आते गए। इसका प्रभाव भी स्थानीय समाज में नजर आता हैं।
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Published on:
01 Nov 2019 11:36 am
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