11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गोमुख मेले में पहले जैसा उत्साह नहीं, यह है वजह

ग्राम पंचायत जमुनिया जेठू में गोमुख मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ प्राचीन प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां कार्तिक पूर्णिमा से मेले का आयोजन किया जाता है।

less than 1 minute read
Google source verification
gomukh

gomukh

परासिया. ग्राम पंचायत जमुनिया जेठू में गोमुख मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ प्राचीन प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां कार्तिक पूर्णिमा से 15 दिनों तक मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर के भीतर भगवान शंकर, चित्रसेन, वीरभद्र, कालभैरव, महावीर स्वामी, पार्वती तथा कार्तिक देव की प्रतिमाएं विराजमान है। पत्थरों के बीच स्थित गो मुख समान चट्टान से लगातार जल धारा गिरती है। प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। गत वर्षों में कोरोना के कारण मेला प्रतिबंधित था। उसका असर इस वर्ष दिखाई दे रहा है, मेला में अपेक्षा अनुसार भीड नहीं है। मेला सिमटकर दस दिनों का हो गया है। बड़ी संख्या में दुकानें लगाई जाती है। जहां आभूषणों से लेकर घरेलू जरुरतों की सामग्री मिलती है। दूर-दूर और दूसरे जिलों से भी लोग यहां दर्शन करने एवं प्रकृति का सौंदर्य देखने पहुंचते थे। मेला उमरेठ से पांच किमी दूर गौरपानी मानकादेही दमुआमाल पंचायत क्षेत्रों के मध्य 50 एकड़ वनभूमि पर लगाया जाता है।