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Gotmar Mela: जाम नदी के तट पर होगा खूनी संघर्ष, पत्थर मारकर निभाएंगे परंपरा

- पोला पर्व के दूसरे दिन तीन सितम्बर को होगा आयोजन - पुलिस-प्रशासन ने की तैयारी

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300 साल पुरानी परंपरा को निभाने पत्थर फेंककर एक दूसरे को करेंगे लहूलुहान

पांढुर्ना जिले के जाम नदी के तट पर मंगलवार तीन सितम्बर को 300 साल पुराने गोटमार मेले की परंपरा को निभाने पांढुर्ना और सांवरगांव पक्ष के बीच गोटमार खेली जाएगी। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर पत्थर मारने की प्रथा को निभाएंगे। खूनी संघर्ष में कई लोग गंभीर घायल होंगे तो कई लोग अपने अंग खो देंगे।
वर्षों से चली आ रही प्रथा निभाते हुए अब तक 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। गोटमार के आते ही मरने वालों के परिवारों की आंखें रूआंसु हो जाती हैं। इस मेले की तैयारियों में पिछले 15 दिनों से प्रशासन जुटा हुआ है। मेला स्थल की साफ सफाई कर सडक़ों को पत्थर की मार से बचाने डस्ट डाला गया है। मेले के आते ही जाम नदी के आसपास रहने वाले मकानों को पत्थर से बचाने सुरक्षित टट्टे लगाए गए हैं। खेल के दो दिनों पहले ही मेला स्थल पर भारी मात्रा में पत्थर जमा हो गए हैं। कलेक्टर अजय देव शर्मा, एसपी सुंदरसिंह कनेश और एएसपी नीरज सोनी ने रविवार दोपहर को मेला स्थल पहुंचकर मेडिकल कैम्प का जायजा लिया।

प्रेमी युगल की याद में बरसते पत्थर

पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस मेले से जुड़ी कई किवदंतियां हैं। एक किवदंती के अनुसार पांढुर्ना के युवक का सांवरगांव की युवती के संग प्रेम था। विवाह के उद्देश्य से युवक युवती को भगाकर लाने की कोशिश करता है। परंतु इस दौरान जाम नदी पार करते दौरान दोनों पक्ष के गांव वाले भी पहुंच गए थे। प्रेमी युगल को रोकने दोनों ओर से पत्थर बरसाए गए थे। इसमें प्रेमीयुगल की मौत हो गई थी। प्रेमीयुगल की याद में झंडा रखकर गोटमार खेली जाती है। इसके अलावा एक अन्य प्रचलित किवदंती के अनुसार पांढुर्ना सांवरगांव में भोसला राजा की सैन्य टुकडिय़ां रहा करती थी। युद्धाभ्यास के लिए नदी के बीचों बीच झण्डा लगाकर पत्थरबाजी की जाती थी। लंबे समय तक चला सैन्य युद्धाभ्यास बाद में परंपरा में बदल गया।

14 लोग गंवा चुके हैं जान

गोटमार खेल में पत्थर लगने से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अब तक 14 लोगों के मरने की जानकारी है। मरने वालों में 1955 में सांवरगांव के महादेव संाबारे की पत्थर लगने से वहीं 1987 में कोठीराम सांबारे की गोली लगने से तो 2005 में जनार्दन सांबारे की मौत हुई थी । सभी एक ही परिवार है। हर साल लगभग 500 खिलाड़ी इस मेले में घायल हो जाते है।