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जिंदगी भर सालता रहेगा गोटमार का दर्द

गोटमार खत्म हो गया, लेकिन कई लोगों के लगे पत्थर दर्द बन कर सालते रहेंगे। शनिवार को गोटमार के दूसरे दिन घायल इलाज कराने अस्पताल पहुंचे। कोई अपनी आंख दिखाने पहुंचा था तो किसी के सिर व मुंह पर पत्थर से चोंटे लगी थी। इस साल गोटमार में २०० से अधिक लोग घायल हो गए थे।

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Gotmar's pain will continue throughout his life

छिंदवाड़ा/पांढुर्ना. गोटमार खत्म हो गया, लेकिन कई लोगों के लगे पत्थर दर्द बन कर सालते रहेंगे। शनिवार को गोटमार के दूसरे दिन घायल इलाज कराने अस्पताल पहुंचे। कोई अपनी आंख दिखाने पहुंचा था तो किसी के सिर व मुंह पर पत्थर से चोंटे लगी थी। इस साल गोटमार में २०० से अधिक लोग घायल हो गए थे। गोटमार के दौरान खिलाडिय़ों को लगी चोट एक्स रे रिपोर्ट में दिखाई दी। कुल पांच लोगों की पत्थर लगने से हड्डी टूटी। इनमें रामचंद्र खुरसंगे (75), सागर कुमरे (21), संजय बड़ोदे शामिल है। इसी तरह भवानी वार्ड निवासी 11 साल की बच्ची गायत्री भांगे के सिर पर चोट लगने से फे्रक्चर हुआ है।गोटमार खेल में झंडा तोडऩा महत्वपूर्ण होता है, लेकिन शुक्रवार को नदी में आई बाढ़ ने पांढुर्ना वालों के लिए झंडा तोडऩा मुशिकल कर दिया था। झंडा नही टूट पाया था। नदी से इसे निकालने के लिए कठिन हालातों का सामना करना पड़ा। नदी से शनिवार तडक़े नगर पालिका के अमले ने झंडा निकाला। शुक्रवार को खेल खत्म होने के बाद भी रात को 8.30 से 9 बजे के बीच नदी से झंडा निकालने की कोशिश कर रही टीम पर लोग पत्थर फेंकते रहे। बताया गया है कि झंडे को खींचने की कोशिश में तीन बार रस्सा टूटा। सुबह 4.30 बजे प्रशासन को सफलता मिली और झंडे को नदी किनारे रखा गया था। सुबह झंडा चंडी माता मंदिर में रखा गया।