
Government has made special diploma mandatory
छिंदवाड़ा. जिले के बीज, उर्वरक और दवा बेचने वाले 120 व्यवसायियों को इस क्षेत्र से सम्बंधित पढ़ाई का डिप्लोमा इस वर्ष मिल जाएगा। पिछली जुलाई से तीन बैच में इन व्यवसासियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये व्यापारी वे हैं जो कृषि से सम्बंधित आदान का व्यापार तो करते हैं लेकिन इस विषय का उनके पास न कोई अध्ययन और न डिग्री या डिप्लोमा है। व्यापार से सम्बंधित जरूरी जानकारी उन्हें हो इसके लिए ये विशेष डिप्लोमा कोर्स इनके लिए शुरू किया गया है। भारत सरकार ने इसका एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स संचालित किया है। इसके तहत कृषि महाविद्यालय व कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक द्वारा इन विक्रेताओं को 48 सप्ताह तक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण हैदराबाद की मैनेज यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार कृषि आधारित कोर्स के माध्यम से दिया जा रहा है। फाइनल परीक्षा जुलाई में होनी है।
छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय पर तीन कक्षाएं लग रहीं हैं। पहली कक्षा कृषि विभाग के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कार्यालय में आत्मा परियोजना के सभागार में लगाई जा रही है। दूसरी कक्षा आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र और तीसरी कक्षा कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव में लग रही है। गुरुवार और श्ुाक्रवार के लग रही प्रत्येक कक्षा में 40-40 प्रशिक्षणार्थी हैं। पूरे जिले के विक्रेता जिला मुख्यालय पर आकर ही सुबह दस से शाम पांच बजे तक प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसमें उन्हें कृषि के सम्बंध में आधारभूत जानकारियों के साथ खेत और मिट्टी, उसकी उर्वरता, मौसम के हिसाब से फसल, उसमें प्रयोग होने वाली दवाई और खाद-बीज आदि के बारे में कृषि विशेषज्ञ, वरिष्ठ वैज्ञानिक व मैदानी अधिकारी विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
प्रशिक्षित नहीं तो रद्द होगा लाइसेंस
ध्यान रहे भारत सरकार ने तीन जनवरी 2019 को कीटनाशक अधिनियम में संशोधन किया है। इसके अनुसार अब कृषि आदान विक्रेताओं को बिना डिग्री या डिप्लोमा व्यापार करने के लिए जनवरी 2020 तक की छूट दी है। इसके बाद यदि विक्रेताअेां के पास डिग्री या डिप्लोमा नहीं हुआ तो दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। यह प्रशिक्षण हैदराबाद की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट मैनेज यूनिवर्सिटी के माध्यम से कराया जा रहा है।
Published on:
18 May 2019 10:30 am
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