19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बकरलिप प्रोजेक्ट के चलते ग्रीन इंडिया मिशन से छूटा ये शहर

बैतूल, होशंगाबाद और सीहोर शामिल, केवल सिखाने पड़े योजना क्रियान्वयन के तरीके

2 min read
Google source verification
Green India Mission

Green India Mission

छिंदवाड़ा. पेंच नेशनल पार्क और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच गुजरते टाइगर कॉरीडोर से जुड़े बकरलिप प्रोजेक्ट के लागू होने की स्थिति के चलते छिंदवाड़ा का नाम नई ग्रीन इंडिया मिशन परियोजना में शामिल नहीं हो पाया है। केवल उसे अपने अनुभव मिशन में शामिल पड़ोसी जिले बैतूल, होशंगाबाद और सीहोर को शेयर करने पड़ रहे हैं। ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट मूल रूप से जंगलों को हरियाली से भरपूर रखने के साथ जैव विविधता संरक्षित करने और ग्रामीणों की आजीविका पर आधारित है।

प्रोजेक्ट में न केवल वन विभाग बल्कि कृषि, उद्यानिकी, रेशम समेत अन्य विभागों की भी सहभागिता है। इसमें रासायनिक खादों के उपयोग रोकने से लेकर जंगल और जल संरक्षण भी शामिल किया गया है। दुर्भाग्य से इस प्रोजेक्ट में छिंदवाड़ा जिला शामिल नहीं हो पाया है। इसका कारण पेंच नेशनल पार्क, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर जोन और जिले के तीन वनमण्डलों में बकरलिप प्रोजेक्ट लागू होना बताया गया है।

हालांकि इस प्रोजेक्ट को एक साल पहले ही बंद किया जा चुका है। फिर भी हाल ही में आए दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सीआर बाबू द्वारा प्रोजेक्ट के अध्ययन करने और पॉजिटिव संकेत देने से इसके पुनर्जीवित होने के आसार है। इस प्रोजेक्ट में अभी तक पांच करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट मूल रूप से जंगलों को हरियाली से भरपूर रखने के साथ जैव विविधता संरक्षित करने और ग्रामीणों की आजीविका पर आधारित है।

पचमढ़ी में हुई ग्रीन इंडिया कार्यशाला
पचमढ़ी में मप्र और छत्तीसगढ़ समेत देश के वन अधिकारियों की दो दिवसीय कार्यशाला का आगाज गुरुवार को हुआ। इस कार्यशाला में पश्चिम वनमण्डल की डीएफओ डॉ.किरण बिसेन ने बकरलिप प्रोजेक्ट का बिंदुवार प्रेंजेंटेशन किया। उन्होंने उपस्थित वन अधिकारियों को प्रोजेक्ट में जंगलों को सुरक्षित रखने के प्रयासों और ग्रामीणों को आजीविका के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने के तरीके के बारे में बताया। प्रोजेक्ट में कार्यशाला शुक्रवार को भी जारी रहेगी।