
निरीक्षण के दौरान मौजूद उपसंचालक और कृषि वैज्ञानिक।
Farming in Chhindwara district
सौंसर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन ज्वार का रकबा पांच हेक्टेयर से बढकऱ 500 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। किसानों के इस उत्साह को देखते हुए उप संचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह, डीन उद्यानिकी महाविद्यालय एवं सह संचालक आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र चंदनगांव डॉ. विजय पराडकर, कृषि वैज्ञानिक सुंदरलाल अलावा ने ग्राम गुजरखेड़ी के किसान सीके सहस्त्रबुद्धे एवं पंधराखेडी के राजेन्द्र पराडकर के ग्रीष्मकालीन ज्वार पर किए गए नवाचार को देखा एवं किसानों से चर्चा की। साथ ही जोबनी में किसानों की बोई गई ग्रीष्मकालीन ज्वार एवं मूंगफली को देखा व किसानों का उत्साह बढ़ाया।
अधिकारियों ने बताया कि विगत वर्ष नवाचार के रूप में पांच हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन ज्वार लगाई गई थी। इसके फायदे को देखते हुए इस वर्ष सौंसर क्षेत्र के लगभग 1000 किसानों ने लगभग 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन ज्वार किस्म हाइटेक 3206 लगाई है। इस नवाचार को किसान बहुत पसंद कर रहे हैं। उनके मुताबिक ग्रीष्मकालीन मूंगफली में लागत अधिक एवं उत्पादन कम और मजदूरों की समस्या के कारण किसानों का रुझान ज्वार की तरफ अधिक बढ़ा है। ज्वार श्री अन्न फसल है। ये पौष्टिक होने के साथ इसका मूल्य अच्छा होता हैं। भ्रमण के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सौंसर योगेश भलावी, कृषि विस्तार अधिकारी निरंजन पवार, दिलीप परतेती, बीटीएम सुभाष साहू, एटीएम पंकज पराडकर एवं कृषक अनिल पराडकर, मनोज हिगवे, देवराव पराडकर, गणेश गोटे आदि उपस्थित हुए।
आम तौर पर ज्वार की फसल खरीफ सीजन में ली जाती है। अनियमित बारिश के कारण ज्वार के दाने काले होने या उत्पादन में कमी होने की संभावना रहती है। ग्रीष्मकालीन ज्वार से किसान 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ औसत उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इससे किसान की प्रति एकड़ आय 50 हजार रुपए हो गई है।
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विश्वविद्यालय के बोर्ड मेंबर व पोल्ट्री इंडस्ट्रीज के विशेषज्ञ डॉ.महेन्द्र सिंह व सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक डॉ.जितेन्द्र कुल्हारे अल्प प्रवास पर जिले के भ्रमण पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय निजी सभागार में जिले के सभी पशु चिकित्सकों की बैठक ली। इसमें जिले में किए जा रहे पशुपालन के क्षेत्र में नवाचार पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। डॉ.राजेश चेडगे ने एनडीडीबी द्वारा संचालित आईवीएफ तकनीक के बारे बताया। जिले में सात वत्सों का जन्म होकर 50 प्रतिशत की उपलब्धता प्राप्त की। इसी प्रकार डॉ.छत्रपाल टाण्डेकर ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत किए जा रहे बकरीपालन, मुर्गीपालन एवं चारा विकास कार्यक्रम के बारे में बताया। मुर्गीपालन प्रक्षेत्र के प्रबंधक डॉ.सोनू कदम ने प्रक्षेत्र द्वारा किए जा रहे नवाचार व लक्ष्यों की पूर्ति के बारे मे जानकारी दी ।
Published on:
27 May 2024 05:48 pm
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