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यहां हिन्दू भी सजाते हैं ताजिया, बाबा हसन-हुसैन को करते हैं याद

पांढुर्ना में मोहर्रम पर कौमी एकता का नजारा देखने को मिलता है। मुस्लिमों के साथ कई हिन्दू अपने घर में ताजिए सजाकर बाबा हसन-हुसैन को याद करते हैं। तिलक वार्ड में रहने वाला ढगे परिवार चार पीढ़ी से परंपरा का निर्वहन करते हुए घर पर ताजिया सजाता आ रहा है।

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remembers Hasan-Hussain

छिंदवाड़ा/पांढुर्ना . पांढुर्ना में मोहर्रम पर कौमी एकता का नजारा देखने को मिलता है। मुस्लिमों के साथ कई हिन्दू अपने घर में ताजिए सजाकर बाबा हसन-हुसैन को याद करते हैं। तिलक वार्ड में रहने वाला ढगे परिवार चार पीढ़ी से परंपरा का निर्वहन करते हुए घर पर ताजिया सजाता आ रहा है। परिवार के सुनिल सुखदेव ढगे बताते हैं कि उनके दादाजी फिर पिता को ताजिया सजाते हुए देखा। परंपरा को हम भी निभा रहे है। मुस्लिम साल के पहले दिन से ही ताजिया सजाकर बाबा हसन -हुसैन की दिन रात पूजा पाठ करते हैं। सातवें दिन भंडारा प्रसादी वितरित की गई। दसवें दिन सवारी निकालकर चौकी पर सलामी के साथ ताजिया का विसर्जन किया गया। घनपेठ वार्ड में रहने वाला रोशन डाबरे अपने रिश्तेदार सोनू जसुतकर के साथ आलम सजाकर दस दिन तक पूजा पाठ करते आ रहे हैं। इस साल आठवां वर्ष है जब आलम को लेकर कुम्हार मोहल्ले में कर्बला के शहीदों की याद में गर्म अंगारों पर चले। रोशन ने भी सातवें दिन विशेष पूजा के साथ भंडारे में खिचड़ा का प्रसाद बांटा। सोनू ने बताया कि सुलेमान सरकार की दरगाह पर पूजा पाठ करते उसे मोहर्रम पर आलम सजाने का ख्याल आया तब से वह घर पर आलम सजाते आ रहे हैं।