
Hinglaj Temple
छिंदवाड़ा/गुड़ी अंबाड़ा. कोयलांचल क्षेत्र के अंबाड़ा स्थित प्रसिद्ध मां हिंगलाज शक्ति पीठ चार हजार मनोकामना कलशों की लौ से जगमगा रहा है। बता दें कि अंबाड़ा स्थित मां हिंगलाज शक्तिपीठ में शारदेय नवरात्र शुरू होते ही भक्तों का सैलाब उमडऩे लगा है।
नवरात्र के मौके पर समूचे हिंगलाज मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। इसके अलावा हजारों की तादाद में मनोकामना कलशों की महा आरती की गई उसके पश्चात कलश स्थापित किए गए। इसके अलावा कुछ कलश अजीवन व कुछ कलश घी के भी जलाए जाते हैं। प्रतिवर्ष कलशों की संख्या में वृद्धि होना लोगों में मां हिंगलाज के प्रति असीम आस्था को दर्शाता है।
छिंदवाड़ा सहित आसपास के जिलों में इतने कलश स्थापित नहीं होते हैं, जो कि अपने आप में रेकॉर्ड है। इसके अलावा इन कलशों की संख्या में प्रतिवर्ष बढ़ती जाती है। वहीं नवरात्र शुरू होते ही हिंगलाज मंदिर में दोनोंं पहर भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। जहांं पर हजारों की संख्या में उपस्थित होकर श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। हिंगलाज मंदिर सहित उपक्षेत्र अंबाड़ा में नवरात्र पूूरे श्रद्धा व भक्ति भाव से मनाया जा रहा है।
हिंगलाज मंदिर सहित मां दुर्गा मंदिर अंबाड़ा, खेड़ापति मंदिर, शीतला माता मंदिर सहित क्षेत्र के पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गईं हंै। जहां पर सुबह-सुबह महिला, पुरुष, बच्चे आदि नंगे पांव तपती धूप में पूजा अर्चना करने मंदिर पहुंच रहे हैं। पूजा-अर्चना कर मां जगदंबा से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। ज्ञात हो कि वर्ष में दो मर्तबा आने वाले शारदेय व चैत्र नवरात्र में हिंगलाज मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुचते हंै। नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी श्रीश्री मां हिंगलाज मंदिर समिति की रहती है, जो कि इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाती है।
यह समिति मोहन कॉलरी के अधिकारी, श्रमिक संगठन व कर्मचारियों के सहयोग सेेे बनाई जाती है। इसके अलावा नवरात्र शुरू होते ही पुलिस प्रशासन भी व्यवस्था बनाने जुटा रहता है, इससे कि मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
यह है विशेषता
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के अलावा मां हिंगलाज का मंदिर छिंदवाड़ा जिले में है। इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि राजस्थान के काठियावाड़ इलाके में हिंगलाज देवी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। हिंगलाज माता को काठियावाड़ के राजा की कुलदेवी माना जा था। प्राचीन काल में राजा के वंशजों को जीविकोपार्जन के लिए छिंदवाड़ा आना पड़ा था। तब वे अपने साथ हिंगलाज माता की प्रतिमा भी ले आए और छिंदवाड़ा में एक कोल माइन के पास इसे स्थापित किया गया। तभी से यहां हिंगलाजा देवी पूजी जाने लगीं।
Published on:
12 Oct 2018 07:24 am
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