लाखों रुपए की लागत से वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया, लेकिन बनने के बाद से अब तक उपयोग में नहीं लाया गया हैं। अस्पताल से निकला पानी प्लांट में एकत्रित हो, जिसके लिए सभी डे्रजन सिस्टम को जोड़ा गया हैं। बताया जाता है कि अस्पताल से निकलने वाला दूषित पानी किसी भी जलस्रोत से मिलने पर उसे भी दूषित कर देता हैं, जिससे वह पीने योग्य नहीं होता हैं।