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Important to know: विद्युत उपकरणों को आकाशीय बिजली से रखना है सुरक्षित, तो अर्थिंग है जरूरी

अर्थिंग की लाइन करंट से हेलमेट की तरह देती है सुरक्षा

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छिंदवाड़ा। बारिश के मौसम में अक्सर ही आकाशीय बिजली कडक़ती है और हमारे घरों की बिजली गुल हो जाती है, लेकिन कुछ देर बाद बिजली फिर आ जाती है। इससे लोगों के मन में ख्याल आता है कि बारिश होते ही बिजली बंद हो गई, सिस्टम ही ठीक नहीं है।
दरअसल, आकाशीय बिजली के गरजते-चमकते ही सब-स्टेशनों में लगे हुए लाइटनिंग अरेस्टर सक्रिय हो जाते हैं और हमारी लाइनों से अधिक क्षमता की बिजली प्रवाहित होने के पहले ही वे ऑफ हो जाते हैं। इससे लाखों वोल्ट बिजली प्रवाहित होने के पहले ही लाइन बंद हो जाती है। इस प्रक्रिया से न सिर्फ बिजली कम्पनी के स्टेशनों, ग्रिडों का बचाव होता है, बल्कि हमारे घरों के उपकरणों की सुरक्षा भी होती है।
बिजली कम्पनी के कनिष्ठ यंत्री जितेंद्र कड़वे ने बताया कि घर के उपकरणों को आसमानी बिजली से बचाना है, तो अर्थिंग लगाना जरूरी है। यह अर्थिंग ही है, जो करंट से हेलमेट की तरह बचाता है।

थ्री पिन गैरजरूरी नहीं, अधिक जरूरी
पत्रिका से बातचीत के दौरान जितेंद्र कड़वे ने बताया कि हमारे घरों में थ्री पिन सॉकेट लगे होते हैं। इन सॉकेट में जो मोटा पिन होता है,
वह गैरजरूरी नहीं, वरन सबसे अधिक जरूरी होता है। दरअसल, यह पिन अर्थिंग से जुड़ा होता है। अर्थिंग ही आसमानी बिजली से उत्पन्न लाखों वोल्ट के करंट को उपकरण तक पहुचंने की जगह, उसे धरती में भेज देता है। इससे उपकरणों की सुरक्षा भी होती है और व्यक्ति भी हताहत होने से बच जाता है। उपकरणों में भी लोगों को कई बार करंट का अहसास होता है, उसके लिए भी अर्थिंग न होना एक कारण हो सकता है।

सॉकेट से अलग करने पर भी होता है बचाव
यूं तो उपकरणों के प्रोटेक्शन के लिए कई डिवाइस आते हैं।
इनमें से वोल्टेज स्टेबलाइजर भी एक है, लेकिन यह मंहगा होने के कारण हर उपकरण के लिए अलग-अलग नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए कनिष्ठ यंत्री जितेंद्र कड़वे ने साधारण सा उपाय बताया कि बारिश के दौरान बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल अधिक जरूरत पडऩे पर ही करें, जरूरत न होने बोर्ड से उनके प्लग निकाल दें। इससे महंगे उपकरण खराब होने से बच जाएंगे।

तडि़त चालक भी हो जाते हैं खराब
माना जाता है कि आसमानी बिजली से सुरक्षा के लिए ऊंचे भवनों, पानी की टंकियों, मोबाइल टॉवरों में तडि़त चालक लगे होते हैं। इनके दायरे में आने पर आसमानी बिजली धरती में समा जाती है। कनिष्ठ यंत्री जितेंद्र कड़वे ने इस बात को भी सही ठहराते हुए कहा है कि धरती करंट के लिए समुद्र है। बस सही माध्यम हो, तो लाखों वोल्ट को भी जन धन हानि के बिना धरती में भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अक्सर आसमानी बिजली गिरने के बाद तडि़त चालक खराब हो जाते हैं, जिसका ध्यान नहीं रखा जाता। इनका हर साल बारिश के पहले निरीक्षण करना चाहिए। तडि़त चालक विद्युत सब स्टेशनों में भी लगे होते हैं, जो लाखों वोल्ट की आसमानी बिजली को सहकर नुकसान से बचाते हैं। बिजली कडकऩे पर लाइन को ट्रिप करके बंद कर देते हैं, जिसे कुछ मिनटों में ही ऑन कर दिया जाता है। यदि यह न हो तो हमारे मंहगे ट्रांसफार्मर, पैनलों का नुकसान हो जाता है। इससे कई घंटों से लेकर कुछ दिनों तक भी बिजली सप्लाई प्रभावित हो जाती है।