
चार माह की बेटी ने ऐसे दी पिता को दी विदाई कि नम हुई सभी आंखें
छिंदवाड़ा. हादसे में गम्भीर रूप से घायल हिमांशु भारद्वाज ने गुरुवार सुबह ७.३० बजे नागपुर के एक निजी हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया। वहीं दस दिन जिंदगी की जद्दोजहद के बाद परिवार की अंतिम उम्मीदें भी टूट गईं। छिंदवाड़ा में सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। १७ माह की बेटी ने उसे मुखाग्नि दी।
गौरतलब है कि जुन्नारदेव के हिंगलाल मंदिर के समीप चार मार्च को रात ९.३० बजे एक चौपहिया वाहन के पलटने से उसमें सवार हिमांशु पिता रामेश्वर सिंह भारद्वाज सहित पत्नी, बेटी व बहन घायल हो गए थे। हिमांशु को अधिक चोट लगने पर छिंदवाड़ा के एक निजी हॉस्पिटल से नागपुर रैफर कर दिया गया था। परिजन ने बताया कि था कि पहले वे हिमांशु को नागपुर के न्यूरॉन हॉस्पिटल ले गए थे। जहां डॉक्टर ने ब्रेन डेड घोषित कर छिंदवाड़ा वापस पहुंचा दिया था।
इसी बीच अगले दिन सोमवार सुबह ५.४५ बजे जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. दिनेश ठाकुर ने मरीज को मृत घोषित कर दिया था।
करीब तीन घंटे शवगृह में रखे गए हिमांशु की पल्स पोस्टमार्टम के ठीक पहले ही चलने लगी। इसे स्वीपर संजू सारवान ने देखा और डॉक्टर को सूचना दी थी। आनन-फानन में डॉक्टरों की टीम ने प्राथमिक उपचार देकर मरीज को दोबारा उच्चस्तरीय इलाज के लिए नागपुर रैफर कर दिया था। जहां दस दिन तक नागपुर के श्योरटेक हॉस्पिटल में उपचार के दौरान मरीज की मौत हो गई।
मृतक की हुई शिनाख्त
सौंसर थाना क्षेत्र की सिल्लेवानी घाटी में पेड़ पर कपड़े से बने फंदे से लटके मिले शव की शिनाख्त गुरुवार को हुई। युवक की शिनाख्त देहात थाना क्षेत्र के ग्राम कुंडाली निवासी राजू (३२) पिता भैयालाल ठाकरे के रूप में हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार राजू १३ मार्च को घर से जामसांवली जाने के लिए निकला था। पुलिस की प्राथमिक जांच और पूछताछ में सामने आया ह कि युवक मानसिक रूप से कमजोर भी था। गुरुवार शव परिजन को सौंप दिया गया। उल्लेखनीय है कि बुधवार की दोपहर शव फंदे पर लटका हुआ मिला था।
Published on:
16 Mar 2018 11:59 am
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