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women’s day 2018 : बेटी बचाओ स्लोगन ही बता रहा कि समाज ने मान लिया कमजोर

गली-मोहल्ले में एक स्लोगन बेटियों को परेशान कर रहा है।

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छिंदवाड़ा .गली-मोहल्ले में एक स्लोगन बेटियों को परेशान कर रहा है। वह स्लोगन है ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ आखिर ऐसा लिखकर हम क्या जता रहे हैं। यह स्लोगन खुद ही बता रहा है कि हम बेटियां कमजोर हैं। हर जगह महिलाओं के अधिकार की बात होती है, लेकिन व्यावहारिकता इसके उलट है। हम महिलाओं के सशक्तिकरण की बातें तो बहुत करते हैं लेकिन यथार्थ यह है कि अधिकारों में हमारी स्थिति कमजोर है और सुरक्षा चिंतनीय प्रश्न। यह बातें बुधवार को ‘पत्रिका’ द्वारा ‘महिला अधिकार एवं सुरक्षा’ विषय पर आधारित परिचर्चा में जिले की महिलाओं ने कहे। महिलाओं का कहना था कि इसका निवारण तभी संभव है जब घर से बच्चों को महिला से सम्मान करना सिखाया जाए। पुरुषों को यह समझना होगा कि बेटी वस्तु नहीं है। इसके अलावा महिलाओं को शिक्षित होने के साथ आर्थिक रूप से मजबूत होना होगा। शिक्षित महिला कानून की जानकारी रखकर खुद के साथ परिवार को भी सशक्त करेगी।


महिलाओं ने क्या कहा
प्रोफेसर अनिता शर्मा कहती हैं कि यह स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। इससे जिला भी अछूता नहीं। हमारी स्थिति कमजोर है और सुरक्षा चिंतनीय विषय। इसके लिए घर से शुरुआत करनी होगी। श्रद्धा कहती हैं कि लड़कियों की एक सीमा तय कर दी गई है। उन्हें चार दीवारी तक सीमित रखा जाता है। हांलाकि समाज में बदलाव आ रहा है। महिलाओं को आत्मसुरक्षा प्रशिक्षण लेकर सशक्त होना होगा। वहीं सरिता डेहरिया कहती हैं कि पूर्व स्थिति हो या वर्तमान महिलाओं को अभी भी अपने अधिकार के साथ लडऩा पड़ रहा है। इसके लिए जरूरी है कि हर महिला शिक्षित हो। हर जानकारी ही उसे अधिकार एवं सुरक्षा दिलाएगी।

साक्षी जायसवाल कहती हैं कि गलियों में एक स्लोगन दिखता है ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’। ऐसे स्लोगन लिखकर यह बताया जा रहा है कि बेटियां कमजोर हैं। जबकि महिला हर क्षेत्र में सफलता की कहानी गढ़ रही है। मधु कहती हैं कि महिलाओं को शिक्षित होना होगा। शिक्षा के अभाव में ही वह कमजोर स्थिति में हैं। कानून की जानकारी ही उनको अधिकार दिलाएगी। सुरक्षा के लिए कानून व्यवस्था अच्छी करनी होगी। निधि सचान कहती हंै कि हम न परिवार को दोष दें और न ही समाज को। महिलाओं ने अपनी स्थिति खुद कमजोर की है। हमें शिक्षित होकर आर्थिक रूप से सक्षम होना होगा। हम खुद कमाएंगे तो अपने फैसले खुद ले सकेंगे।