
छिंदवाड़ा/ जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत देवगढ़ के किले की जीर्णशीर्ण 62 बावली को सहेजने के लिए जिला पंचायत एक करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च करेगी। इसके लिए वाटर शेड मिशन से कार्ययोजना बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इस किले के जीर्णोद्धार के लिए जिला पंचायत सीइओ ने भारतीय पुरातत्व संस्थान को पत्र भी लिखा है।
जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर मोहखेड़ के समीप करीब चार सौ साल पुराना यह किला कभी यह मध्यभारत के बड़े गोंडवाना राजवंश का केंद्र बिंदु था और राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था। राजवंश के पतन और अंग्रेजी शासनकाल के चलते यह किला अपना गौरव खो बैठा। अब इसके भग्नावशेष इसकी गाथा सुनाते नजर आते हैं।
जिला पंचायत सीइओ ने किया निरीक्षण
इस किले को देखने हाल ही में जिला पंचायत सीइओ गजेेंद्र सिंह नागेश पहुंचे और उन्होंने किले का निरीक्षण करते हुए 62 बावली की तलाश की। उनके मुताबिक किले में बावली का होना प्राचीन समय में जल संरक्षण की नजीर थी। इस बावड़ी के पुर्नत्थान का बीड़ा उठाया गया है। सीइओ का कहना है कि उन्होंने इस किले के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व संस्थान के अधिकारियों को पत्र लिखा है। वे जिला पंचायत के वाटरशेड मिशन प्रोजेक्ट में 62 बावली को शामिल करेंगे। एक करोड़ रुपए से अधिक के इस प्रोजेक्ट को जल्द तैयार कर शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
Published on:
10 Mar 2020 03:19 pm
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