
Kerosene distribution stopped from ration shops
छिंदवाड़ा। शहर समेत जिले के ग्रामीण अंचलों में मिट्टी तेल का वितरण पूरी तरह बंद हो गया है। इससे ईंधन का एक विकल्प हमेशा के लिए खत्म हो गया है। अब शहरी इलाकों में लोग सिर्फ रसोई गैस पर निर्भर है। जबकि ग्रामीण अंचलों में अभी भी भोजन पकाने में लकडिय़ों और कंडों का उपयोग कर रहे हैं। इन गांवों में उज्ज्वला गैस कनेक्शन जरूर दिए गए हैं, लेकिन इसकी रिफिलिंग एजेंसियों में बहुत कम हो रही है।
जिले में इस समय आबादी करीब 23.50 लाख है। इनमें से 16.50 लाख लोग राशन दुकानों के उपभोक्ता हंै। इन्हें छह माह पहले एक लीटर मिट्टी तेल दिया जाता था। इसके भाव 85 रुपए पहुंच जाने पर जरूरतमंदों परिवारों ने इसका उपयोग ही बंद दिया। इससे केरोसिन एजेंसियों ने भी इसे शासन के समक्ष सरेंडर कर दिया। तब से ही लम्बे समय तक घरेलू किचन में उपयोग होता आया, केरोसिन हमेशा के लिए विदा हो गया। तब से शहरी क्षेत्र में रसोई गैस ही ईधन का बेहतर विकल्प रह गया है।
गांवों में सिलेण्डर कम, लकड़ी, कंडे ज्यादा उपयोग
गांवों में केन्द्र सरकार की ओर से गरीब परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन जरूर दिए गए हैं, लेकिन उनका उपयोग आय कम होने से बढ़ नहीं पा रहा है। गैस एजेंसियों के संचालक से लेकर पेट्रोलियम कंपनियां तक के सर्वेक्षण में स्वीकार किया कि रसोई गैस के दाम 900 रुपए होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवारों ने सिलेण्डर की रिफिलिंग करानी ही बंद कर दी। गैस एजेंसियों में बांटे गए सिलेण्डर और रिफिलिंग के आंकड़ों में भारी अंतर आ गया है। लोग दो वक्त की रोटी पकाने के लिए ये लोग लकड़ी, कंडा, कोयला का उपयोग कर रहे हैं।
केरोसिन बंद होने बढ़े गैस कनेक्शन
जिले के पांच लाख से अधिक परिवार में से 2.32 लाख गरीब परिवार को 42 एजेंसियों के माध्यम से उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिए गए हैं, तो वहीं सामान्य गैस कनेक्शनधारियों की संख्या 2.99 लाख है। सरकारी सब्सिडी सामान्य परिवार को छह रुपए तथा उज्जवला गैस कनेक्शन धारी को 206 रुपए प्रति सिलेण्डर उपलब्ध है।
इनका कहना है...
पूरे जिले में केरोसिन का वितरण बंद हो गया है। अब लोग ईधन के लिए रसोई गैस पर निर्भर है। इससे गैस कनेक्शनों की संख्या बढ़ रही है।
-अंजु मरावी, सहायक आपूर्ति अधिकारी
Published on:
29 Jan 2024 11:29 am
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