
Kishore Kumar's Birthday special
छिंदवाड़ा के सुभाष सिंगारे का अपने इस पसंदीदा गायक के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। हर वर्ष किशोर कुमार की जयंती और पुण्यतिथि पर यह आयोजन अब छिंदवाड़ा की पहचान बन गया है। सुभाष बताते हैं कि बालिग होने की उम्र में आराधना के गाए उनके गीतों से एेसा जादू चढ़ा कि फिर उतरा ही नहीं। पेशे से शिक्षक सुभाष सिंगारे को किशोर के गाए सैकड़ों गाने याद है।
छिंदवाड़ा. फिल्मों में पाश्र्व गायन को लेकर जब भी बातचीत होती है सबसे ज्यादा चर्चा किशोर कुमार की होती है। फिल्मों में हरफनमौला की भूमिकाएं अदा करने वाले किशोर ज्यादा प्रसिद्ध हुए अपनी आवाज के लिए। पर्दे के पीछे भी अपने इसी अंदाज के साथ उन्होंने देश और दुनिया को अपना दीवाना बनाया। शनिवार 4 अगस्त को उनकी जयंती पर देशभर में उनकी गायकी को पसंद करने वाले आयोजन करते हैं। छिंदवाड़ा के सुभाष सिंगारे का अपने इस पसंदीदा गायक के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। हर वर्ष किशोर कुमार की जयंती और पुण्यतिथि पर यह आयोजन अब छिंदवाड़ा की पहचान बन गया है। इन दो दिन तो उनके घर उत्सव सा माहौल रहता है और दोपहर से देर रात तक किशोर कुमार के गाए गीतों की आवाज गूंजती रहती है। कलाकार उनके यहां आते हैं और गीतों को गाकर अपने चहेते गायक को भावांजलि अर्पित करते हैं। किशोर कुमार की गायकी और व्यक्तित्व से वे कितने प्रभावित हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने बेटे का नाम तो उन्होंने किशोर कुमार रखा ही और अपनी बेटी के लिए जो दामाद चुना वह भी किशोर नाम का ही चुना। वे कहते हैं कि ये संयोग है लेकिन उन्हें खुशी होती है।
वर्षों से हो रहा आयोजन
तीस वर्ष से ज्यादा हो गए। वे यह आयोजन करते आ रहे हैं। सुबह बाकायदा किशोर द के छायाचित्र पर माल्यार्पण होता है। हवन-पूजन के साथ उनकी आरती की जाती है। जो भी आता है पहले वह उन्हें पुष्पांजलि देता है फिर उत्सव में शामिल होता है। हां इस दिन सुभाष सिंगारे उपवास पर रहते हैं और रात को कार्यक्रम संपन्न होने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। वे कहते हैं कि किशोर कुमार सबसे अलग थे। चमक-दमक के बीच भी उन्होंने अपने अंदर के किशोर को जिंदा रखा अपने खंडवा को याद रखा। यही कारण है दुनिया भर में उन्हें शोहरत-इज्जत के साथ प्यार भी मिला और लोग उनके कायल हो गए।
सैकड़ों गाने हैं याद
सुभाष बताते हैं कि बालिग होने की उम्र में आराधना के गाए उनके गीतों से एेसा जादू चढ़ा कि फिर उतरा ही नहीं। पेशे से शिक्षक सुभाष सिंगारे को किशोर के गाए सैकड़ों गाने याद ही नहीं है उन गीतों के साथ किशोर की जुड़ी कहानियां भी उन्हें पता है। किशोर कुमार के गाए बंगाली और हिंदी गीतों का बड़ा कलेक्शन उनके पास है। उनकी यादों को एक एलबम के रूप में भी उन्होंने संजों कर रखा है। वे कहते हैं गीतकार, संगीतकार, अभिनेता, निर्देशक इतने गुण एक ही व्यक्ति में होना ही उसकी क्वालिटी को बताता है। सबसे बड़ी बात दुनिया में पैसा और नाम मिलने के बाद भी अपनी मिट्टी को न भूलना उन्हें औरों से महान बनाता है।
Published on:
04 Aug 2018 05:40 pm
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