
छिंदवाड़ा कुसमेली मंडी में सीजन के दिनों में आवक की अधिकता से जाम की समस्या बन जाती है। इस समस्या के निदान के लिए छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ ने नवाचार किया है। व्यापारियों ने एक बैठक कर आपस में सहमति से खुली ट्रॉली में रखी उपज की बोली लगाने का निर्णय लिया है। सुबह 10 से 11 बजे तक खुली ट्रॉली की ही नीलामी होगी। उसके बाद खुले ढेरों की बोली लगेगी। बोली के बाद ट्रॉली को किसान क्रेता व्यापारी के गोदाम में भी उपज की तौल के लिए भेज सकता है। इसके लिए व्यापारी संघ ने मंडी प्रबंधन से भी बातचीत की है। उम्मीद है कि व्यापारियों के इस नवाचार से मंडी में उपज की आवक के जमावड़े पर रोक लग सकेगी।
नियमों का पेंच आ सकता है आड़े
व्यापारियों के इस नवाचार में मंडी के नियमों का पेंच फंस सकता है। नियमों के अनुसार मंडी में पहुंचकर जिस उपज की नीलामी होगी, उसकी तौल मंडी परिसर में ही होनी चाहिए। यदि किसान की ट्रॉली में बोली के बाद व्यापारी उसे अपने गोदामों में बुलवाकर तौल करवाता है, इसके बाद कोई अनियमितता सामने आई तो इसकी जिम्मेदारी मंडी पर ही होगी। इसके लिए मंडी अधिकारियों ने सौदा पत्रक अथवा फॉर्म गेट ऐप के माध्यम से बिक्री की व्यवस्था को अधिक सुलभ बताया है।
एकरूपता की होगी समस्या
कुसमेली कृषि उपज मंडी में अधिकांश छोटे व्यापारी भी अपनी उपज को बेचने पहुंचते हैं। उनकी उपज में कई किसानों की उपज शामिल होती है, जिसके लिए पाला खंजर (मिक्स) किया जाना जरूरी है। इन व्यापारियों को पहले से ही अपनी उपज को पाला खंजर कर एकरूपता लाकर मंडी में लाना जरूरी होगा, ताकि ट्रॉली में ऊपर से लेकर नीचे तक गुणवत्ता में एक सी दिखे और नीलामी के बाद व्यापारी को उसे निरस्त करने का कोई कारण न मिले। मंडी के सभी शेडों में ट्रॉली खड़ी करने की नहीं है व्यवस्था भले ही किसानों के उपज की खुली ट्रॉली में पहले बोली लगाने की सुविधा दी जाए, लेकिन मंडी के पास ऐसे शेडों की संख्या काफी कम हैं, जहां ट्रॉली को लगाकर उसमें बोली लगाई जा सके।
शेड क्रमांक तीन उपयुक्त
दरअसल, ट्रॉली को मंडी शेड के प्लेटफॉर्म पर ही लगाया जाता है ताकि बोली लगाने वाले व्यापारी ट्रॉली से उपज को हाथ में लेकर भी देख सकें। हालांकि मंडी सचिव ने इसके लिए शेड क्रमांक तीन को उपयुक्त बताया है, जहां ट्रॉली को खड़ा करके बोली लगाई जा सके। इसके अतिरिक्त ज्यादातर किसान एवं छोटे व्यापारी पिकअप जैसे छोटे वाहनों में अपनी उपज लेकर आते हैं।
उपज की एकरूपता जरूरी
व्यापारियों से चर्चा हुई है। उनके नवाचार से समय की बचत होगी। विवाद से बचने के लिए उपज की एकरूपता जरूरी होगी। मंडी परिसर में नीलामी एवं तौल का ही नियम है, हालांकि परिसर के पास ही दुकान या गोदाम में तौल किया जा सकता है। दूर ले जाने की स्थिति में आपसी सहमति से सौदा पत्रक बनवाया जा सकता है।
- सुरेश कुमार परते, सचिव, कुसमेली कृषि उपज मंडी
आपसी सहमति भी जरूरी
मंडी के अंदर भी गोदाम है, कुछ बाहर भी हैं। मंडी पर्ची कट जाने के बाद टैक्स सुनिश्चित हो जाता है। मंडी के नियमों के दायरे में कार्य होगा। हालांकि किसान एवं क्रेता व्यापारी के बीच तौल को लेकर आपसी सहमति भी जरूरी है। उससे पहले नीलामी के लिए उपज की एकरूपता किसान या छोटे व्यापारी की जिम्मेदारी है।
- प्रतीक शुक्ला, अध्यक्ष छिंदवाड़ा
Published on:
02 Jan 2024 07:23 pm
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