
leprosy patients
छिंदवाड़ा. हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन और चेहरे पर लालिमा जैसे लक्षण से शरीर में प्रवेश करने वाले कुष्ठ रोग के प्रति जागरुकता की कमी हर दिन नए संक्रमितों को जन्म दे रही है। ऐसे लोग सामाजिक प्रतिष्ठा के डर से झोलाछाप चिकित्सकों के इलाज के चक्कर में भी पड़ जाते हैं, जिससे यह बीमारी सरकारी रिकार्ड में अपेक्षा के अनुरूप चिन्हित भी नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस सामाजिक व्यवहार पर चिंता जताई है।
जिले की करीब 24 लाख की आबादी पर रजिस्टर्ड कुष्ठ रोगियों की संख्या केवल 165 है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के एक अनुमान के अनुसार प्रति 10 हजार की जनसंख्या पर इस रोग के लक्षण मौजूद हैं। लक्षण नजर आने पर लोग इसे सामान्य बीमारी मानते हैं तो एक समस्या यह भी है कि कुष्ठ रोग निवारण कार्यक्रम को संचालित करने के लिए स्टाफ की कमी हैं। इसे संबंधित अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं। जबकि इस बीमारी के इलाज के लिए छमाही और साल भर का एमडीटी उपचार कोर्स मौजूद है। जिससे पूर्णत: स्वस्थ हुआ जा सकता है।
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ये लक्षण रोग के जन्मदाता, न करें अनदेखी
चमड़ी पर फीके पीले या लाल सुन्न दाग, चेहरे पर लालिमा, सूजन, तेलिया-तामिया चमक, कान, चेहरे या शरीर पर गांठ, हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन, सूखापन, मुख्य सतही तंत्रिकाओं में मोटापन सूजन और उन्हें टटोलने में दर्द, हाथ-पैर की अंगुलियों में टेड़ापन।
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दैवीय प्रकोप नहीं, ये वैक्टीरिया जनित
कुष्ठ रोग माइको बैक्टीरियम लेप्री नामक रोगाणु से होता है। जिनमें पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता है। उन्हें यह नहीं हो पाता। जबकि समाज में यह धारणा है कि कुष्ठ रोग पूर्व जन्म के पाप का फल है और कोई दैवीय प्रकोप है। अनुवांशिकी और छूत का रोग है। डॉक्टर ऐसी धारणाओं को खारिज करते हैं। वे यह भी साफ करते हैं कि चमड़ी पर दूधिया सफेद दाग कुष्ठ नहीं है। यह मेलानिन की कमी से होता है।
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एमडीटी दवा नहीं खाई तो जीवन भर में 30 नए रोगी
चिकित्सकों के अनुसार यदि कोई कुष्ठ रोग एमडीटी दवा की शुरुआत नहीं करता तो उसके संक्रमण से जीवन भर में 30 नए रोगी पैदा हो जाते हैं। जबकि दवाइयों से कुष्ठ के रोगाणु निष्क्रिय हो जाते हैं। इससे संक्रमण भी रुक जाता है। छमाही और 12 माह के कोर्स से रोग निवारण हो जाता है।
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ेकुष्ठ कार्यक्रम के लिए 27 पद, संभाल रहे केवल 9 कर्मचारी
स्वास्थ्य विभाग के कुष्ठ रोग निवारण कार्यक्रम के संचालन के लिए जिले में 27 पद है लेकिन उन्हें केवल 9 कर्मचारी संभाल रहे हैं। अगले माह 4 कर्मचारियों का रिटायरमेंट है। इससे ये संख्या और कम हो जाएगी। ग्रामीण अंचल में आशा कार्यकर्ता भी सहयोग नहीं कर रही है। इससे कार्यक्रम संचालन की गति भी सुस्त पड़ी हैं।
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इनका कहना है...
कुष्ठ रोगी का सहीं समय पर इलाज शुरू नहीं हुआ तो वे नए संक्रमित को जन्म दे देते हैं। समाज में लोग इसकी अनदेखी करते हैं और झोलाछाप के चक्कर में पड़ जाते हैं। जिला अस्पताल में हम प्रतिमाह 7-8 रोगी देख रहे हैं। जिन्हें दवा का सेवन कराया जा रहा है।
-डॉ.चंद्रशेखर जायसवाल, चर्म रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज।
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कुष्ठ रोग के चिन्हांकन और कार्यक्रम संचालन में स्टाफ की कमी चुनौती है। वर्तमान में 165 रोगी उपचाराधीन है। आशा कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
-डॉ.पुष्पा रानी सिंह, जिला कुष्ठ अधिकारी।
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महत्वपूर्ण तथ्य
जिले में अनुमानित आबादी-24.1 लाख
वर्ष 2021-22 में 127 कुष्ठ रोगी
वर्ष 2022-23 में 59 नए रोगी
एमडीटी दवाइयों से स्वस्थ-21 रोगी
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Published on:
13 Jul 2022 07:02 am
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