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Machagora Dam: गड़बड़ी का ग्रहण, खेत अब भी प्यासे

नहर के जरिए हर खेत तक पानी पहुंचा पाना है चुनौती तो बांध के समीप दर्जनभर गांवों में नहर बना पाना तक मुश्किल

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chhindwara

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प्रभाशंकर गिरी
छिंदवाड़ा. माचागोरा डैम की अथाह जलराशि ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्र को खेती में सम्पन्न तो बना दिया, लेकिन अब भी सिवनी और छिंदवाड़ा जिले की हजारों हैक्टेयर जमीन प्यासी है। जहां एक ओर तकनीकी खामी की वजह से नहरों के जरिए मिलने वाला पानी कई किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा तो वहीं भौगोलिक विषमता के कारण बांध से लगे करीब दर्जनभर गांव आज भी सिंचाई के साधनों की राह देख रहे हैं।

दरअसल, खेतों तक सिंचाई के लिए नहर तो बना दी गई, लेकिन टूट-फूट और गुणवत्ताहीन काम की वजह से हर खेत तक पानी पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। शुरुआती दौर में ही कहीं नहर तो कहीं पुलिया के निर्माण में कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। वहीं वर्ष 2017 में ही टेस्ंिटग के दौरान नहर का कॉन्क्रीट तक धराशायी होने का मामला सामने आ चुका है। बीते बारिश में कपुर्दा के समीप नहर का करीब एक किलोमीटर का हिस्सा धंस चुका है। इससे नहरों की गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्तमान में भी मुख्य नहरें क्षतिग्रस्त हैं। डिस्ट्रीब्यूटरी और सब-डिस्ट्रीब्यूटरी नहरें अब भी अधूरी हैं। हर बार सिंचाई से पहले नहरों को दुरुस्त करने का दावा जरूर किया जाता है, लेकिन यदि गुणवत्ता और तकनीकी पर जोर दिया जाता तो हर बार इसकी नौबत ही न आती।
वहीं दूसरी ओर माचागोरा बांध की 20 से 25 किलोमीटर की परिधि में आने वाले करीब दर्जनभर गांवों के हजारों किसान भौगोलिक विषमता का दंश झेलने को मजबूर हैं। इन गांवों में आज तक न तो नहर का निर्माण हो सका न ही सिंचाई के लिए कोई योजना विभाग के पास है। लोनियामारू, धनोरा गोसाईं, बोहनाढ़ाना, पाथखेड़ा, बोहनाखैरी, घाट परासिया, उमरिया ईसरा, चोरगांव समेत कई गांव ऐसे हैं जिनका पूरा हिस्सा या तो कुछ हिस्सा ऊंचाई पर बसा हुआ है। इन हिस्सों तक नहर के जरिए पानी पहुंचा पाने के लिए सम्बंधित विभाग के पास कोई कारगर योजना नहीं है।
एक माह बाद भी नहीं पहुंचा था पानी: नवम्बर 2020 में सिवनी व बखारी ब्रांच केनाल में पानी छोड़े जाने के एक माह बाद भी किसान पानी का इंतजार करते रहे, लेकिन पानी नहीं आया। वजह थी टूटी-फूटी नहरें। अधिकारियों ने समय रहते मरम्मत का आश्वासन दिया था, लेकिन वह पूरा नहीं हो पाया।

सर्वे के बाद अधिकारियों ने कर दिया था इनकार
करीब दो वर्ष पहले सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मिलकर क्षेत्र में नहरों के निर्माण की मांग की गई थी। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने सर्वे के बाद नहरों के निर्माण से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि ये क्षेत्र ऊंचाई पर हैं जहां नहरों के जरिए पानी ला पाना काफी मुश्किल है। हम कोई ऐसी योजना चाहते हैं जिसके जरिए हमारे खेतों का पानी मिल सके। बांध के इतने करीब होने के बाद भी इस क्षेत्र के किसानों को हर वर्ष सिंचाई के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
गर्जनलाल मसराम, सरपंच, ग्राम लोनियामारू

लोनियामारू, चोरगांव, बरेलीपार, तेंदनी सहित चांद और चौरई क्षेत्र के करीब बीस गांवों में ऊंचाई की वजह से नहर के जरिए पानी पहुंचा पाने में मुश्किल हो रही है। फिलहाल समस्या के समाधान के लिए विभागीय मंत्री और अधिकारियों से चर्चा जारी है। इसके लिए पत्राचार भी किया जा रहा है।
सुजीत सिंह चौधरी, विधायक, चौरई

रबी सीजन में पेंच नहर से छिंदवाड़ा और सिवनी जिले में 73 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वर्ष 65 हजार हैक्टेयर में पानी पहुंचाने का प्रयास किया गया था। इस समय नहरों की मरम्मत का काम चल रहा है। 15 नवम्बर से सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा।
-आरके भलावी, एसडीओ, पेंच डिविजन चौरई