छिंदवाड़ा. बिहार के दशरथ मांझी ने गांव को अस्पताल से जोडऩे के लिए तीन किमी पहाड़ काट दिया था तो वहीं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का 21 वर्षीय किसान खेतों तक जाने के लिए सड़क बना रहा है। गणेश ग्रेजुएशन के छात्र हैं। सपना पढ़कर खेती करने का है। 12 एकड़ की जमीन में गणेश नई तकनीकी से खेती करना चाहते हैं, लेकिन जब खेत को इनकी सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है तो वे अपने खेतों तक बहुत परेशानी से पहुंच पाते हैं। रास्ते में पत्थर हैं जिस कारण आवागमन नहीं हो पाता।
पारडसिंगा सतनुर रोड से खेत तक जाने वाला रास्ता बरसात के समय पानी में डूब जाता है। यह रास्त 40 किसानों के 450 एकड़ की जमीन को जोड़ता है। खेतों तक जाने के लिए दूसरा कोई रास्ता नहीं है। जब किसी ने किसानों की इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया तो गणेश ने सड़क बनवाने का संकल्प लिया और एक मुश्किल लक्ष्य की ओर अपने कदम बढ़ाए।
10 किमी लगाना पड़ता है चक्कर
गणेश को छोड़कर सभी किसान ठेके से खेती करवा रहे हैं। कारण कि खेतों तक पहुंचने में दिक्कत होती है। इस कारण सभी किसानों ने अपनी जमीन ठेके से दे रखी है। ऐसे में उनको मुनाफा नहीं हो पा रहा। दूसरे रास्ते से जाने में सड़क खराब होने के कारण दो किमी की सड़क 10 किमी हो जाती है और 10 मिनट का रास्ता तय करने में एक घंटे का समय लगता है। ऐसे में गणेश ने खुद पहल की और अकेले सड़क बनाना शुरू किया।
शुरू में तो घर वालों ने भी नहीं दिया साथ
गणेश बताते हैं कि आधा किमी की ये सड़क लगभग 50 सालों से ऐसी ही है। बरसात में पानी भर जाता है और किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पाते। आम दिनों में भी यहां से अनाज का परिवहन नहीं हो पाता। बैलगाड़ी या अन्य साधन खेतों तक नहीं पहुंच पाता है। पहले सरपंच से गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तब मैं खुद कुदाल-फावड़ा लेकर सड़क बनाने लगा। घर वालों ने कहा कि तुम अकेले नहीं कर पाओगे, लेकिन मैंने कहा कि शुरुआत तो करनी ही होगी।
अब अन्य किसान कर रहे मदद
गणेश ने जब काम शुरू किया तो किसी किसान ने उनका साथ नहीं दिया। वहां पत्थर काटने की किसी की हिम्मत नहीं हुई है, लेकिन गणेश के इरादे पत्थर से भी मजबूत थे। वे प्रयास करते रहे और किसी तरह काम शुरू किया। धीरे-धीरे जब अन्य किसानों को लगा कि ये असंभव नहीं है तो अब वे भी अपना सहयोग दे रहे हैं। अन्य किसान सुधीर, पंकज वानखेड़े, भोजराजी, चिंतामन, रमेश, रविकांत और विथोबा ने बताया कि मजदूरी हम खुद कर रहे हैं और किसानों के साथ-साथ अन्य लोगों से भी चंदा भी मांग रहे हैं। क्योंकि श्रमदान के अलावा सड़क निर्माण में रुपए की भी आवश्यकता पड़ेगी। अभी तक 20000 रुपए इकठ्ठा हो गया है। इस काम में अब पारडसिंगा के सरपंच नाथूजी भुजाड़े भी अपना सहयोग दे रहे हैं।