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Mahadev Mela: ऊंची-पथरीली पहाड़ियों पर थमते नहीं कदम, देखिए तस्वीरों में

आस्था पहुंचा देती है चौरागढ़ बाबा के धाम, सतपुड़ा अंचल के सबसे बड़े मेले में भूरा भगत से लेकर पचमढ़ी तक उमड़ा भक्तों का सैलाब

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मनोहर सोनी
छिंदवाड़ा। सतपुड़ा की पहाड़ियों पर विराजे भगवान महादेव अपने दर्शन से पहले अपने हर भक्त की कड़ी परीक्षा लेते हैं। भूरा भगत और पचमढ़ी से उनके चौरागढ़ धाम तक करीब पांच से 20 किमी की पैदल यात्रा में न जाने कितनी ऊंची, पथरीली, खड़ी और उबड़-खाबड़ पहाडिय़ां हर कदम पर राह रोकती हैं और चेहरे पर थकान के भाव ला देती हैं लेकिन जैसे ही पीछे से हर बोला, हर महादेव का जयघोष सुनाई देता है, श्रद्धा और विश्वास अपने आप कदम आगे बढ़ा देते हैं फिर जब अंत में मुस्कराते बाबा के दर्शन होते हैं तो सारी पीड़ा अलौकिक आनंद में बदल जाती है।
देवाधिदेव के अपने भक्त भूरा भगत के दर्शन, पहाड़ियों में भ्रमण करने की कथा को जानने और जगह-जगह बिखरे प्राकृतिक सौंदर्य तथा आध्यात्मिक अनुभूति को महसूस करना हो तो चले आइए सतपुड़ा अंचल के सबसे बड़े महादेव मेला पर। महाशिवरात्रि एक मार्च तक चलने वाले इस आयोजन की शुरुआत हो चुकी है और लाखों भक्त हर दिन पहुंचने लगे हैं। चौरागढ़ की पहाड़ी पर आकर लगता है कि इस धरती पर पहाड़ी, खाई, फूल,पत्ते, झाडिय़ों और हवा में बिखरे शिवत्व को श्रद्धा और आस्था की नजर से देखा जा सकता है। भोलेनाथ के दर्शन की पैदल यात्रा कठिन जरूर है पर भक्त का विश्वास जीत जाता है।

इस मेले में छोटे बच्चे से लेकर महिलाएं, युवा, बुजुर्ग नाचते गाते, कूदते, झूमते हर कदम पर नजर आते हैं। छिंदवाड़ा, होशंगाबाद समेत मप्र से भक्त कम होंगे पर महाराष्ट्र के लोगों की इस महादेव धाम पर अधिक आस्था है। वे पूरी संख्या पर भारी पड़़ेंगे। एक बात और है कि जगह-जगह पानी, खान-पान, जड़ी-बूटियों की दुकान लगाने वालों की मीठी बोली..चलो भगत, कुछ दूरी पर मंदिर है.. शारीरिक थकान को नई आस दे देते हैं।

इस बार कोरोना संक्रमण की लहर थमने से दुकानदारों में उत्साह है। वे अपनी रोजी-रोटी पर बाबा का आशीर्वाद मांगते। बस ऊपर चौरागढ़ मंदिर में तैनात पुलिसकर्मी प्रवेश से पहले जब मास्क लगवाते हैं, तब एकबारगी एहसास होता है कि कोरोना की लहर भले ही चली गई हो पर मेला में तो सतर्कता जरूरी है।

भूराभगत से ज्यादा दूरी तो पचमढ़ी से कम
छिंदवाड़ा से जुन्नारदेव सांगाखेड़ा के भूराभगत मंदिर से चौरागढ़ महादेव की यात्रा शुरू की जाए तो करीब 20 किमी तक चौरागढ़ महादेव तक पैदल चलना पड़ता है। इसमें सात से आठ घंटे का औसत समय लगता है। जबकि पचमढ़ी के मठ से पैदल यात्रा से पहाड़ी का रास्ता पांच से दस किमी के बीच है, जिसमें औसतन तीन घंटे में मंदिर पहुंचा जा सकता है।

भक्त से भाव से आसान हो जाती है यात्रा
यदि भगवान शिव के प्रति प्रेम, आस्था और दृढ़ विश्वास है तो कठिन दुष्कर पहाडिय़ां भी रास्ता दे देती हैं। यह कहना है छिंदवाड़ा से गई धरमटेकरी मार्निंग वॉक ग्रुप के सदस्यों का। गु्रप के वरिष्ठ अनिल मिश्रा, मिलाप चौहान, चंद्रविजय बागरे, रंजीत सूर्यवंशी, ओपी सूर्यवंशी, निलेश लाखोटिया, मूलचंद साहू, राहुल अग्रवाल, दीपक चौरसिया, नरेश सूर्यवंशी, कृपाशंकर सूर्यवंशी, महेंद्र पटेल, संतोष दुबे समेत अन्य सदस्यों ने कहा कि बाबा महादेव का जयघोष हर दिन धरमटेकरी पर करते हैं। उनका बुलावा आया तो सभी सदस्यों ने एक साथ दर्शन किए।