
Railways: The game of jamming the indent has started
छिन्दवाड़ा. खरीफ सीजन की मुख्य फसल मक्का को आधे से ज्यादा किसान बेच चुके हैं, तब जाकर भाव समर्थन मूल्य 1870 प्रति क्विंटल से अधिक 19 सौ रुपए पर आया है। व्यापारियों ने इसका कारण बिहार में गर्मी में ली जानेवाली मक्का की कम बोवाई होना बताया है। इसके साथ ही आसपास की मंडियों में भी मक्का की कमजोर आवक बताई गई है।
कृषि उपज मंडी कुसमेली में इस समय मक्का की आवक करीब 20 हजार क्विंटल के आसपास है। व्यापारी तेजी से इसकी खरीदी करने में लगे हुए हैं। कपड़ा, स्टार्च और कुक्कट समेत अन्य उद्योग में मांग बढ़ जाने से इसका भाव 1900-50 रुपए तक दे रहे हैं। तीन साल में यह पहली बार हैं जब मक्का के भाव सर्वोच्च स्तर पर आए है।
यह भी दुखद है कि करीब 2.60 लाख हेक्टेयर में बोई गई मक्का की फसल का भाव शुरुआत में 1300-1400 रुपए रहा। जिसमें आधे से ज्यादा किसानों ने अपनी आर्थिक जरूरतों के चलते उसे बेच दिया। वर्तमान मूल्य को देखकर उन्हें नुकसान ही उठाना पड़ा। अब जबकि मक्का के भाव आसमान पर पहुंच रहे हैं,तब किसानों के पास घरों में उपज का स्टॉक नहीं रह गया है। मंडी में इस समय आ रही मक्का किसी छोटे व्यापारी के पास है तो कुछ बड़े किसानों के घर में बची है। छोटे किसान अपनी उपज पहले ही बेच कर निकल गए हैं।
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आसपास की मण्डी में भी कमजोर आवक
कृषि उपज मंडी से जुड़े अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रतीक शुक्ला का कहना है कि बाजार में मक्का की आवक पहले से कम हो गई है। आसपास की मंडी चौरई, सिवनी, गोटेगांव और बैतूल में भी आवक कम दिखाई नहीं दे रही है। बाजार और उद्योगों में मक्का की मांग बढ़ गई है। शुक्ला का यह भी कहना है कि इस बार बिहार की गर्मी की मक्का फसल की बोवाई कम होने की जानकारी आई है। इससे अगली फसल का उत्पादन कम होने की आशंका है। यह भी एक कारण है कि इस बार कोरोना संक्रमण के लक्षण सामान्य होने पर बाजार में इसका कोई प्रभाव नहीं होने की धारणा भी है। इन सब कारणों से मक्का का भविष्य अभी उज्जवल दिखाई दे रहा है।
Published on:
19 Jan 2022 10:05 am
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