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छिंदवाड़ा। बदलते दौर के साथ अब इलेक्ट्रॉनिक तराजू का इस्तेमाल वस्तुओं की बिक्री के लिए होने लगा है, लेकिन अब भी 50 प्रतिशत से ज्यादा दुकानदार पुराने तरीके के तराजू का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इन तराजू से न सिर्फ उपभोक्ताओं को चपत लगाई जा रही है, बल्कि कई दुकानदार सामान तौलते समय विशेष तरीकों का इस्तेमाल करके उपभोक्ताओं की जेब काट रहे हैं। हाल ही में एक ग्राहक ने बताया कि फल लेने के दौरान एक ठेला दुकानदार ने आधा किलो सेब तौला। जब सेब की तौल बराबर हो गई, तो ग्राहक को शक हुआ। बांट रखने वाले पलड़े पर ही बांट को कुछ अलग खिसकाया तो एक बार फिर 200 ग्राम तक सेब कम हो गया। दुकानदार इस बात पर नाराज होकर सेब देने से ही मना कर दिया। बता दें कि इन दुकानदारों को जब रोका-टोका जाता है, तभी पुराने तराजू पर तौल रहे सामान को ज्यादा दिखाकर देते हैं, ताकि बाहर कहीं तौल में यह पकड़े न जाएं।
नापतौल से और मिल गई छूट
जहां इलेक्ट्रानिक तराजू में हर साल नापतौल से जांच कर सील मुहर लगाने का नियम है, वहीं अब इन पुराने तराजू में सील मुहर लगाने के लिए दो साल का समय मिल रहा है। सील मुहर लगाने के दौरान ही तराजू-बांट की भी माप होती है। इस दौरान उनकी खराबी को भी ठीक किया जाता है। दुकानदार इसका फायदा उठाते हैं और ग्राहकों को सामान कम देकर अधिक मुनाफा कमाने का प्रयास करते हैं। सब्जी एवं फलों की तौल में सबसे अधिक इस्तेमाल इन्हीं तराजू का हो रहा है। यहां बता दें कि नापतौल विभाग में पूरे जिले के लिए एक ही निरीक्षक होने के कारण न तो ठीक तरीके से जांच हो पाती है और न ही निरीक्षक जिले के हर शहर पहुंच पाते हैं।
इनका कहना है
नापतौल विभाग के पास अमले की कमी होने के कारण नियमित जांच नहीं हो पा रही है। पूरे जिले में एक ही निरीक्षक पदस्थ है। मेरे द्वारा समय समय पर जांच की जाती है, आगे भी जांच की जाएगी।
ए एस पटेल, निरीक्षक नापतौल विभाग, छिंदवाड़ा
Published on:
03 Sept 2022 10:54 am
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