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पंचायतों के आरक्षण से गड़बड़ाया गणित

ग्राम पंचायतों के हुए आरक्षण में ग्राम पंचायत मालेगांव एकमात्र अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित की गई है। यह आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार किया गया है।

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panchayat

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छिंदवाड़ा/पंाढुर्ना. ग्राम पंचायतों के हुए आरक्षण में ग्राम पंचायत मालेगांव एकमात्र अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित की गई है। यह आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार किया गया है।
ग्राम राजाना के निवासी अनंता कोसमकर ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर एससी वर्ग की सीटों की संख्या दो करने की मांग की है। ताकि उनके वर्ग को नेतृत्व करने का मौका मिल सकें। इससे पहले ग्राम पंचायत सिवनी के ग्रामीणों ने एसटी वर्ग के लिए आरक्षित होने पर इसे निरस्त कर एससी वर्ग के लिए आरक्षित करने की मांग की थी। परंतु नियम के अनुसार यदि गांव में एक भी आरक्षित वर्ग का निवासी है तो उसे आरक्षण का लाभ प्रदान किया जाएगा। जबकि सिवनी में कुल 3 परिवार एसटी वर्ग के निवास कर रहे है। जनपद पंचायत के अंतर्गत कुल 76 ग्राम पंचायतें है। इनमें से 61 ग्राम पंचायतें अधिसूचित क्षेत्र में आने से सरपंच पद पर अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला या पुरूष ही चुनाव लड़ सकेगा। जाटलापुर, उमरीकला से लेकर मारूड, तिगांव ,सिराठा , लेंढोरी से काराघाट कामठी तक ग्राम पंचायतें अनुसूचित क्षेत्र के लिए आरक्षित है। 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण प्राप्त होने पर 39 ग्राम पंचायते महिलाओं के लिए आरक्षित की गयी है। इनमें अनुसूचित क्षेत्र की 31 ग्राम पंचायते और गैर अनुसूचित क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायते शामिल है।