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हो रहा दूषित बर्फ का उपयोग, चौक-चौराहों पर बिक रही अमानक खाद्य सामग्री, जिम्मेदार नहीं करते जांच
छिंदवाड़ा. चिलचिलाती धूप में गर्मी भगाने शहर के चौक-चौराहों पर आपको मैंगो शेक की दुकान सजी नजर आएगी। इन दुकानों में आपको १० रूपए में एक गिलास मैंगो शेक आसानी से मिल जाएगा, लेकिन मैंगो शेक पीने वाले यह जानने का प्रयास नहीं करते हैं कि सौ रूपए किलो बिकने वाले आम का शेक १० रूपए में कैसे मिल रहा है। १० रुपए में मिलने वाले मैंगो शेक की पड़ताल पत्रिका ने सोमवार को शहर में कई स्थानों पर की। इस दौरान यह बात सामने आई कि शेक में आम की मात्रा कम होती है तथा अन्य चीजें मिलाई जाती है, जिससे स्वाद व कलर आम जैसा हो जाता है। इस दौरान जो बर्फ उपयोग की जाती है वह भी दूषित होती है, जो आसानी से दुकानदारों को उपलब्ध हो जाती है। पड़ताल में यह बात निकल कर भी सामने आई है कि अगर एक गिलास मैंगो शेक लोगों को उपलब्ध कराया जाता है। उसका सहीं खर्चा ३० से ३५ रुपए गिलास होता है।
अरारोड तथा एसेंस का उपयोग
मैंगो शेक बनाने में आमतौर पर दूध, शक्कर और आम का उपयोग किया जाता है, लेकिन सडक़ किनारे ठेलों में मिल रहे शेक में पाउडर, एसेंस, अरारोड तथा बर्फ का उपयोग किया जाता है। इन चीजों से शेक स्वादिष्ट तो लगता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए घातक है। वहीं संतरा, मौसंबी, सेव आदि के जूस में ग्लूकोज के नाम पर शैक्रीन व शक्कर मिलाई जा रही है। मिलने वाले इन जूसों में सबसे खतरनाक उपयोग होने वाली बर्फ होती है जो कि दूषित पानी से बनाई जा रही है।
सेम्पल के नाम पर खानापूर्ति
गर्मी के सीजन में सजने वाली इन दुकानों पर जांच के नाम पर खाद्य एवं औषधि विभाग सेम्पल एकत्रित करने की बात करता है, लेकिन लिए गए सेम्पल की रिपोर्ट कभी नकारात्मक नहीं आती है, जो अपने आप में सवाल खड़ा करती है। सीजन में एक बार भर निरीक्षक द्वारा सेम्पल लिया जाता है, जिसके बाद दोबारा जांच नहीं की जाती है। जांच करने वाले निरीक्षक की कार्यशैली पर हमेशा से सवाल निशान लगते रहे हैं। पत्रिका पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि आधा गर्मी सीजन निकल गया, लेकिन अधिकांश स्थानों में कोई जांच करने नहीं पहुंचा है।
Published on:
19 May 2018 12:00 pm
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