
मध्यप्रदेश चुनाव 2023
छिंदवाड़ा। जिले की तीसरी शक्ति मानी जा रही अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी को मोनिका बट्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ते ही संकट का सामना करना पड़ रहा है। निर्वाचन आयोग में मान्यता संबंंधी प्रक्रिया पूरी न होने पर उनके छिंदवाड़ा समेत पूरे प्रदेश में उतारे गए 55 उम्मीदवारों के एबी फॉर्म निरस्त हो गए। खुद इस पार्टी के दूसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष झमक सरेयाम व अन्य उम्मीदवार निर्दलीय हो गए।
देखा जाए तो इस पार्टी का गठन वर्ष 2019 में अमरवाड़ा के पूर्व विधायक स्व.मनमोहन शाह बट्टी ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से अलग होकर किया था और निर्वाचन आयोग में इसका रजिस्ट्रेशन कराया था। वर्ष 2020 में उनके निधन के बाद पार्टी की कमान उनकी बेटी मोनिका बट्टी ने संभाली थी। इस विधानसभा चुनाव के आते-आते इस पार्टी में गुटबाजी बढ़ी और विवाद पार्टी की मान्यता को लेकर हो गया। निर्वाचन आयोग में इसकी प्रक्रिया अधर में रही। इस बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष रही मोनिका ने सितम्बर 23 में पार्टी त्याग दी और भाजपा को ज्वाइन कर लिया। इसके बाद झमक सरेयाम पार्टी अध्यक्ष बने।
चुनाव के इस दौर में सरेयाम ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बतौर छिंदवाड़ा की सात विधानसभाओं में स्वयं समेत सात उम्मीदवार खड़े किए। इसके साथ पूरे प्रदेश में भी प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया। यह संख्या कुल 55 रही।
आयोग से मान्यता न होने पर फॉर्म निरस्त
इन सभी उम्मीदवारों ने पार्टी के नाम पर नामांकन दाखिल कर दिए। उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी का अधिकृत फॉर्म भी उपलब्ध करा दिया, लेकिन निर्वाचन आयोग से इसकी मान्यता न होने पर सभी रिटर्निंग अधिकारियों ने इसे निरस्त कर दिया। जहां अभा गोंडवाना के उम्मीदवारों ने अलग से निर्दलीय फार्म भरा था, वहां उन्हें निर्दलीय बतौर प्रतीक चिह्न आवंटन हो गए।
मौजूदा चुनाव से पार्टी की भूमिका समाप्त
इस घटनाक्रम से मौजूदा चुनाव में इस पार्टी की भूमिका ही समाप्त हो गई है, जिसे पहले जिले की तीसरी शक्ति माना जा रहा था। उल्लेखनीय है कि चुनाव मैदान पर राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जनसेवा गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवारों के फॉर्म उनका रजिस्ट्रेशन और मान्यता होने से स्वीकार हो गए। हालांकि कुछ उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए तो कुछ अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
‘पूरी नहीं की मान्यता प्रक्रिया’
अभा गोंडवाना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष झमक सरेयाम का कहना है कि मोनिका बट्टी से उनका विवाद सिर्फ पार्टी की मान्यता को लेकर हुआ था। इसे उन्होंने निर्वाचन आयोग के समक्ष पूरा नहीं करवाया। पार्टी छोडकऱ चली गई। इसके चलते उनकी ओर से जारी पार्टी अधिकृत एबी फॉर्म निरस्त हो गए।
Updated on:
03 Nov 2023 11:20 am
Published on:
03 Nov 2023 11:18 am
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