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विनय पुरवार
छिंदवाड़ा। बीते वर्षों में नगर निगम ने शहर को व्यवस्थित करने का काफी प्रयास किया, ताकि लोगों की सुविधाओं में इजाफा हो, लेकिन दूरगामी सोच और योजना में खामियों की वजह से सफल नहीं हो पाया। शहर के बाजारों को व्यवस्थित करने के लिए बुधवारी बाजार और इंदिरा तिराहा में योजना तो बनाई गई, लेकिन इस दोनों स्थानों को अपनी मंशा के अनुरूप बना पाने में असफल रहा। वहीं एक्सीलेंस स्कूल के सामने भी बड़े जोर-शोर के साथ सब्जी बाजार व्यवस्थित करने की योजना थी जो शुरू होने के पहले ही पार्क में बदल गई। अभी वर्तमान में जेल बगीचा पर बनाए गए चबूतरों पर सब्जी दुकानदारों को शिफ्ट करने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। दूरगामी सोच का अभाव और बिना पूरी तैयारी के शहर को व्यवस्थित करने की हर योजना का पलीता निकल रहा है।
निगम की मंशा
बाजार के किसी एक हिस्से को व्यवस्थित कर एक तरह के उत्पादों की दुकानों का समूह बनाया जाता है ताकि न तो उपभोक्ता को भटकना पड़े न ही बाजार में यातायात बाधित जैसी अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। नगरनिगम द्वारा वर्षों से ऐसे प्रयास किए जाते रहे हैं, लेकिन बिना प्लान के ऐसी योजनाएं हर बार असफल साबित हो रही हैं।
नतीजा: ऐसी योजनाओं में दुकानदारों का व्यवस्थापन कर नई व्यवस्था बनाई गई, लेकिन हर बार सुविधाओं के अभाव और बाजार में प्रतिस्पर्धा की होड़ के चलते दुकानदारों ने इससे मुंह मोड़ लिया।
जबकि होना यह चाहिए...
निगम को किसी भी योजना पर काम करने से पहले उन लोगों का फीडबैक लेना चाहिए जो उस योजना से प्रभावित या लाभान्वित होंगे। योजना शुरू करने से पहले ही भावी समस्याओं के निदान तलाश लेने चाहिए। उनकी सहभागिता के साथ शुरू की गई योजना तभी सफल होगी जब सभी को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलेगा। इसके बाद नगर निगम और अन्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की राय लेकर दूरगामी सोच के साथ योजना को मूर्तरूप रूप दिया जाए। योजना के क्रियान्वयन के बाद मॉनिटरिंग भी बेहद जरूरी है।
जेल तिराहा पार्किंग बाजार
दो वर्ष पहले अनगढ़ हनुमान मंदिर से लेकर, पोस्ट ऑफिस के सामने एवं मुख्य बाजार से फल व फूल विक्रेताओं के लिए जेल तिराहा पार्किंग की जगह का चुनाव किया था। यहां करीब सौ दुकानें आराम से लग जाती, लेकिन बिना तैयारी के जगह आवंटित कर दी गई।
कमी: बीचोंबीच बनी सिर्फ एक दुकान के चक्कर में पीछे की आधा सैकड़ा दुकानें खाली रह गईं। उक्त दुकानदार ने दुकान तो रखी साथ ही सामने और शेड लगाकर दुकान बढ़ा ली। इससे पीछे दुकान लगाने वाले खुद को ठगा महसूस करने लगे। कुछ दिन वहां दुकान लगाई, लेकिन जब सामग्री की बिक्री नहीं हुई तो वापस पोस्ट ऑफिस के सामने पहुंच गए।
एमएलबी रोड का पार्क
शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के सामने कभी सब्जी दुकानदारों के लिए प्लेटफॉर्म बनाए गए थे। इसमें दीनदयाल पार्क के आसपास के सब्जी दुकानदारों को बैठाया जाना था, लेकिन दूरगामी सोच के अभाव में नगर निगम की यह योजना भी असफल रही।
कमी: यहां जगह काफी कम थी और स्कूल प्रबंधन बच्चों के आने-जाने की चिंता को लेकर विरोध भी जता चुके थे। दुकानदारों ने भी विरोध किया तो यहां सब्जी बाजार की जगह पार्क बना दिया गया। हालांकि मिश्रित दुकानें अब भी यहां लगाई जाती हैं। यहां कपड़े की वे दुकानें लगाई जा रही हैं जिन्हें कभी नगर निगम टाउनहॉल के आसपास जगह मिली हुई थी।
बुधवारी बाजार
बुधवारी बाजार में फुटपाथी दुकानदार सब्जी एवं फल विक्रेताओं के लिए पेड़ एवं मंदिर के चारों ओर चबूतरे बना दिए गए। दुकानों का आवंटन किया गया ताकि बाजार व्यवस्थित हो। प्रयास था कि दुकानों के आवंटन के बाद सडक़ पर अतिक्रमण न हो।
कमी: निगम का अमला सडक़ पर फैले अतिक्रमण को रोकने में नाकाम रहा। सडक़ पर बढ़ रहे अतिक्रमण से उनका व्यापार प्रभावित होने लगा जो आवंटित चबूतरों पर दुकान लगाने लगे थे। नतीजा कुछ ने तो दुकान खाली कर दी और दूसरों को किराए दे दी। ज्यादातर ने फिर से बाहरी हिस्सों में ही दुकाने लगा लीं। इससे अंदर के हिस्से के चबूतरे खाली रह गए।
जेल बगीचा
दीनदयाल पार्क, पानी की टंकी वाली सडक़ पर 300 से अधिक सब्जी एवं फल विक्रेता कब्जा कर अपनी दुकानों को सजाकर बैठे हुए हैं। इन दुकानदारों को जेल बगीचा पर 21 चबूतरे बनाकर शिफ्ट किया जाना है, लेकिन आवंटन के बाद भी योजना साकार नहीं हो पाई।
कमी: सुविधाओं का अभाव बड़ी वजह है। साथ ही दुकानदारों के हिसाब से चबूतरे पर्याप्त नहीं बनाए गए। जब दुकानदारों ने छाया की बात की तब शेड बनाए जा रहे हैं। चबूतरों की ऊंचाई को देखते हुए सीढिय़ां बनाई जा रही हैं, लेकिन अभी भी 11 चबूतरों का काम निरस्त है। बताया जा रहा है बचे हुए दुकानदारों को चबूतरों के सामने नीचे जगह दी जाएगी।
Published on:
29 Apr 2022 10:55 am
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