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National Lok Adalat: वह हुआ जो मुमकिन न था

बिछड़े लोगों को सुलह-सहमति से खुशी-खुशी घर पहुंचाया, सुलझाए 12 सौ से अधिक केस, मोटर दुर्घटना के 52 प्रकरणों में 1 करोड़ 26 लाख के अवॉर्ड पारित

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File Photo ,National Lok Adalat : 'न्याय चला निर्धन के द्वार' को साकार करेगी राष्ट्रीय लोक अदालत,इन दिन होगा आयोजन

छिंदवाड़ा। परस्पर समझौते के आधार पर आमजन को त्वरित एवं सुलभ न्याय दिलाने के लिए शनिवार को लगाई गई नेशनल लोक अदालत में 1233 केस सुलह-सहमति से सुलझाए गए। जिला न्यायालय छिंदवाड़ा तथा तहसील न्यायालय परासिया, चौरई, पांढुर्ना, सौंसर, जुन्नारदेव, अमरवाड़ा, हर्रई, तामिया में 41 खण्डपीठों ने इस पर फैसले दिए।
प्रधान जिला न्यायधीश जितेेंद्र कुमार शर्मा ने नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। जिला न्यायधीश सविता ओगले ने बताया कि मोटर दुर्घटना के 52 प्रकरणों में 1,26,94,000 रुपए चेक बाउंस के 176 प्रकरणों में 2,23,46,925 रुपए के अवार्ड पारित किए गए। इसी प्रकार राजीनामा योग्य दांडिक 347 प्रकरणों सहित न्यायालयों में लंबित कुल 850 प्रकरणों में दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर राजीनामा किया। इसी प्रकार बैंकों, नगरपालिका, विद्युत विभाग के प्रिलिटिगेशन के 583 प्रकरणों में 50,00,231 रुपए की वसूली की।

लिया फिर से साथ रहने का फैसला
कुटुम्ब न्यायालय के समक्ष लंबित 5 प्रकरण विवाह विच्छेद तथा 7 केस दाम्पत्य जीवन की पुनस्र्थापना के थे। पीठासीन अधिकारी चंद्र देव शर्मा एवं सुलहकर्ता सदस्य ने समझाइश दी। दम्पतियों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर अपने प्रकरण में सहमति पूर्वक राजीनामा किया तथा भविष्य में विवाद न करने का प्रण करते हुए मुस्कुराकर न्यायालय से विदा हुए व विवाद का अंत किया। इसके अतिरिक्त
भरण-पोषण के 71 प्रकरणों में पक्षकारों के द्वारा राजीनामा कराकर न्यायालय से खुशी-खुशी विदा हुए।

विवाह विच्छेद केस में कराया समझौता
कुटुम्ब न्यायालय के समक्ष दो दंपत्तियों ने आपसी सहमति से विवाह विच्छेद करने का आवेदन पेश किया। जिसमें पीठासीन अधिकारी एवं सुलहकर्ता सदस्य की समझाइश पर दंपती ने राजीनामा कर प्रकरण को वापस लिया। इस प्रकार कुटुंब न्यायालय के समक्ष लंबित कुल 88 प्रकरणों में दंपत्तियों ने प्रकरणों में राजीनामा किया। राजीनामा करने वाले पक्षकारों को पौधा वितरण किया गया।