21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

“#onedayiwill: घरों में झाड़ू पोछा कर बेटी को बनाया नेशनल प्लेयर

40 वर्षीय गीता नागवंशी ने मुश्किलों के सामने घुटने नहीं टेके और बेटी को बुलंदी तक पहुंचाया। 

2 min read
Google source verification

image

mithilesh dubey

Mar 08, 2016


छिंदवाड़ा. आज महिला दिवस है। हमारे देश में तमाम ऐसी महिलाएं हैं जो विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ीं और बुलंदियों को छुआ। लेकिन हम जिस महिला की बात कर रहे हैं वो अपने बेटी के जुनून के लिए लड़ रही है। हम ऐसी महिला की बात कर रहें जो घरों झाडूं पोछा करती है लेकिन अपनी बेटी को नेशनल प्लेयर बनाया। 40 वर्षीय गीता नागवंशी ने मुश्किलों के सामने घुटने नहीं टेके और बेटी को बुलंदी तक पहुंचाया।
जिले की सीनियर फुटबॉल टीम की खिलाड़ी 20 वर्षीय अल्का नागवंशी 20 वर्षीय अल्का कक्षा 12वीं की छात्रा हैं। जब वह छह वर्ष की थीं तभी सिर से पिता का साया उठ गया। अलका ने बताया कि पांच वर्ष की थीं तब पड़ोसी के घर टीवी पर फुटबॉल देखा करती थी और वहीं से शुरू हुआ कुछ कर गुजरने का जज्बा। वहीं उनकी मां कहती हैं कि अल्का की जिद को पूरा करना असंभव तो नहीं था लेकिन मुश्किल और कांटो भरा जरूर था।

घरों में काम कर बेटी को आगे बढ़ाया

अल्का ने छह वर्ष की उम्र से फुटबॉल खेलना तो शुरू कर दिया, लेकिन अल्का के साथ एक भाई की परवरिश करना मुश्किल था। ऐसे में मां गीता ने खुद जिम्मा उठाया और दूसरों के घरों में काम करने लगीं और उससे जो भी आय होती है उससे भरण पोषण करती हैं। कई बार तो कर्ज भी लेना पड़ता है।

किया जिले का प्रतिनिधित्व

अल्का ने जिले से राष्ट्रीय टूर्नामेंट के अंडर 14, 16 और 19 टीम का गोवा, औरंगाबाद और नागपुर में प्रतिनिधित्व किया। साथ ही सीनियर टीम का अंडमान निकोबार में प्रतिनिधित्व किया, जहां मैन ऑफ द मैच से भी नवाजा गया। अब उनका सपना प्रख्यात खिलाड़ी मेसी के साथ खेलने का है।

पड़ोसियों ने मारे ताने

अल्का की मां गीता बताती हैं, जब अल्का ने फुटबॉल खेलना शुरू किया तो हमारी गरीबी का पड़ोसियों ने खूब मजाक बनाया और ताने मारे। तब पड़ोसी कहते थे कि ये लड़कों का खेल है। लड़की भला इसे क्या खेल पाएगी, लेकिन अब समय बदल गया है अब जब अल्का मेडल लेकर आती है तो पड़ोसी भी खुश हो जाते हैं।

ये भी पढ़ें

image