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400 साल से भक्तों की आस्था का केंद्र है मां भद्रकाली मंदिर

सतपुड़ा की वादियों में जाम नदी के तट पर 400 साल पुराना मां भद्रकाली मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र में पूरे प्रदेश तथा महाराष्ट्र के दूरदराज ग्रामों से श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं।

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Navratri-2023

Navratri-2023

पिपला. सतपुड़ा की वादियों में जाम नदी के तट पर 400 साल पुराना मां भद्रकाली मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र में पूरे प्रदेश तथा महाराष्ट्र के दूरदराज ग्रामों से श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं।
प्रचलित जानकारी के अनुसार महाराजा रघुजी भोंसले के शासन काल में श्रृंगेरी मठ के तीन महंतों संमेद्रपुरी स्वामी, योगेश पुरी स्वामी,विद्यानंद पुरी ने वर्ष 1606 में मंदिर का निर्माण कराया था।
गर्भगृह में मां भद्रकाली, मां अन्नपूर्णा, भगवानशिव, गणेश, गौरी नन्दी की प्रतिमाएं है। भैरव महाराज की भी प्रतिमा स्थापित की गई है। द्वार के चारों और इष्ट देवताओं को अंकित किया गया है।
मंदिर के सामने मकरध्वज की प्रतिमा, चौसठ मातृका योगिनी नवग्रह की प्रतिमाएं है। नवरात्र के दौरान मां के दरबार में तडक़े चार बजे से रात 10 बजे तक भक्तों का तांता लगा रहता है। प्रांगण में पूर्व दिशा की ओर में तीनों महंतों के सभाकक्ष है। मंदिर का निर्माण दुर्गा माता यंत्र और वास्तु शास्त्र के अनुसार किया गया है। मंदिर की व्यवस्था के लिए ट्रस्ट बना हुआ है । वर्तमान सरभराकर महंत राजेश संजय पुरी है। इनके नेतृत्व में माता के भक्त व्यवस्थाएं संभालते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में रोजोना विविध अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है।