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सीएम की नसीहत के बाद ये करने मजबूर हुए अधिकारी

सीसीएफ और डीएफओ की मौजूदगी में तामिया में पढ़कर सुनाए गए नाम,परासिया में भी सघन जांच पड़ताल

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छिंदवाड़ा.मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नसीहत के बाद वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने शुक्रवार को आदिवासियों के वनाधिकार दावों के रिकार्ड दोबारा निकलवाए और स्थानीय स्तर पर एक-एक प्रकरण की सुनवाई की तथा विभागीय स्तर पर निराकरण कराया। तामिया और परासिया में सीसीएफ और डीएफओ की मौजूदगी में दावेदारों का पक्ष भी सुना गया। उनके नामों की सूची को पढ़कर भी सुनाया गया।
बीते ६ अप्रैल को पातालकोट के रातेड़ सम्मेलन में आए मुख्यमंत्री ने मंच से ही वनाधिकार दावों में आ रही समस्या का हल करने की संयुक्त जिम्मेदारी कलेक्टर और डीएफओ को सौंपी थी। इसी दिशा-निर्देश का पालन करते हुए सीसीएफ यूके सुबुद्धि और पश्चिम वनमण्डल की डीएफओ डॉ.किरण बिसेन ने तामिया रेस्ट हाउस में कार्यशाला की। भारिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष उर्मिला भारती की मौजूदगी में वनाधिकार दावों की जांच पड़ताल कर्मचारियों ने की। इस कार्यशाला में बताया गया कि तामिया जनपद से पूर्व में ३८६ वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। सांगाखेड़ा परिक्षेत्र के २३८ प्रकरणों में से ३६ प्रकरण पंचायत स्तर पर लंबित बताए गए एवं २०२ प्रकरणों के स्थल सत्यापन के नवीन आवेदन प्राप्त हुए। जिनके निराकरण ३१ मई तक किए जाने के निर्देश दिए गए। जनपद पंचायत जुन्नारदेव से प्राप्त २३८ प्रकरणों की सूची को पढ़कर सुनाया गया। इसके अलावा वनमण्डल से प्राप्त ८९ प्रकरण हितग्राहियों की सूची को भी बताया गया,जिनकी आपत्तियों का निराकरण शीघ्र किया जाना है। कार्यशाला में वन सुरक्षा समिति घटलिंगा के अध्यक्ष मतभानसा भारती भी उपस्थित हुए।

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परासिया में भी चली दावों की पड़ताल
परासिया उपवनमण्डल में एसडीओ अनादि बुधोलिया ने क्षेत्रीय रेंजर और वनरक्षक की उपस्थिति में वनाधिकार दावों की जांच पड़ताल की। इस समीक्षा में कुल २२२ व्यक्तिगत एवं पांच सामुदायिक प्रकरण प्राप्त हुए। जिसमें २०८ प्रकरणों का निराकरण कर जनपद पंचायत को प्रेषित किया गया। शेष १९ प्रकरण की कार्यवाही लंबित बताई गई है। जिसे भी शीघ्र निराकृत किया जाएगा।

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