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परतला आवासीय प्रोजेक्ट: छह साल से बैंक लोन की किश्त भर रहे, हितग्राहियों को नहीं मिला मकान

छह साल बाद भी मकान नहीं मिला है। उनकी पीड़ा यह भी है कि प्रधानमंत्री आवास की सब्सिडी 2.50 लाख रुपए भी नहीं दी गई है।

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परतला हाउसिंग प्रोजेक्ट के 23 हितग्राहियों में से अधिकांश की बैंक लोन की किश्त जमा हो रही है। उन्हें छह साल बाद भी मकान नहीं मिला है। उनकी पीड़ा यह भी है कि प्रधानमंत्री आवास की सब्सिडी 2.50 लाख रुपए भी नहीं दी गई है।


हितग्राहियों ने महापौर को दिए आवेदन में कहा कि प्रचार होडिंग्स/बोर्ड से जानकारी प्राप्त होने के उपरांत वर्ष 2019 में नगर पालिक निगम से परतला हाउसिंग प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 32 लाख एवं 34 लाख रुपए में मकान बुक कराए थे। प्रोजेक्ट को पूरा करने की अंतिम 18 माह थी। 6 साल बीत जाने के बाद भी आज तक आवास का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसके कारण हम हितग्राही आर्थिक रूप से परेशान हैं।


आवेदन में कहा गया कि वर्ष 2019 में सभी हितग्राहियों ने आवास भवन बुकिंग के दौरान नगर पालिक निगम की शर्तों के अनुसार 10 प्रतिशत बुकिंग राशि जमा की थी। इसके बाद बैंक से होम लोन लेकर निगम की मांग के अनुसार 10 लाख से 30 लाख तक की राशि जमा कर दी है। विडंबना यह है कि इन पिछले 5 वर्षों से होम लोन के एवज में बैंक की किश्त भी दे रहे हैं एवं किराये के मकान में रहने को भी मजबूर हैं। निगम की ओर से परतला प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य देरी से शुरू हुआ, जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना की करीब 2.50 लाख रुपए की सब्सिडी नहीं मिल सकी।


इमलीखेड़ा में मकान हैण्डओवर, परतला में काम शुरू नहीं


नगर पालिक निगम के निर्माणाधीन इमलीखेड़ा और परतला के मकानों के प्लॉट का साइज़, मकान की बनाबट, बाहरी एवं आंतरिक डिजाइन एक जैसा है। इमलीखेड़ा और परतला के मकानों का एक ही टेंडर हुआ और कार्यादेश भी एक ही जारी हुआ। काम भी एक साथ शुरू हुआ। फिर भी इमलीखेड़ा प्रोजेक्ट के मकानों को हितग्राहियों को हैण्डओवर किया जा चुका है जबकि परतला प्रोजेक्ट में 5 मकान का काम अभी ठीक से शुरू भी नहीं हो सका है।


परतला आवास में 11 एससी-एसटी परिवार


परतला में मकान लेने वाले ज्यादातर परिवार सीमित आय वाले शासकीय कर्मचारी/सेवानिवृत कर्मचारी हैं इसमें भी अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के 11 परिवार हैं। ऐसे परिवारों को बार-बार नोटिस देकर नगर निगम ने मकान निर्माण के अनुपात में पूरी किश्त तो ले ली लेकिन करीब 6 साल बाद भी मकान सुपुर्द नहीं किया।