14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

धरती से पाताल जाने का रास्ता! ये हैं दुनिया की सबसे गहरी गुफा

धरती से पाताल जाने का रास्ता! ये हैं दुनिया की सबसे गहरी गुफा

2 min read
Google source verification
patal lok ka rasta,patal lok,patal lok in hindi,patal lok

छिंदवाड़ा. अभी तक आपने फिल्मों, टीवी सीरियलों और कल्पनाओं में पाताल जाने का रास्ता देखा होगा, लेकिन आज हम आपको धारती से पाताल जाने का रास्त बताएंगे। यह रास्ता मध्यप्रदेश में स्थिति है। जिला मुख्यालय छिंदवाड़ा से ७८ किमी दूर सतपुड़ा की पहाडि़यों के बीच जमीन के १७०० फीट नीचे स्थित है पाताल में जाने का रास्ता। इस क्षेत्र को पातालकोट के नाम से जाना जाता है।

पाताल से अर्थ इसका एक गहराई में बसा होना है। इसके मुहाने पर ऊपर बैठ कर जब नीचे झांका जाता है, तो इसका आकार एक घोड़े की नाल जैसा नजर आता है। ऐसी जनश्रुति है कि यह पाताल लोक जाने का दरवाजा है। एक समय यहां के आदिवासी बाहरी दुनिया से दूर थे, लेकिन अब सरकारी प्रयासों से वे समाज की मुख्य धारा में शामिल हो गए हैं।

पौराणिक मान्यता हैं कि मेघनाथ, भगवान शिव की आराधना कर पाताललोक में गया था। यह इलाका जड़ी-बूटियों के लिए भी जाना जाता है। पातालकोट के १२ गांव गैलडुब्बा, कारेआम, रातेड़, घटलिंगा-गुढ़ीछत्री, घाना कोडिय़ा, चिमटीपुर, जड़-मांदल, घर्राकछार, खमारपुर, शेरपंचगेल, सुखाभंड-हरमुहुभंजलाम और मालती-डोमिनी है, जहां एक समय जाना मुश्किल था। अब इसे पक्की सडक़ से जोड़ दिया गया है। यहां की आबादी भारिया और गौंड आदिवासी समुदाय की हैं, जो अभी भी काफी हद तक प्राकृतिक व्यवस्थाओं पर आश्रित हैं।

कहा जाता है कि इस जनजाति के लोग इस स्थान पर पिछले ५०० वर्षों से निवास कर रहे है। यह स्थान प्राकृतिक रूप से एक गहरी गर्त का किला-सा बन गया है। इसकी तलहटी से आसपास की पर्वत श्रेणियां करीब १२०० फीट ऊंची हैं। इसके पाास से ही दूधी नदी बहती है। वर्तमान में नीचे जाने के मार्ग बना दिए गए हैं। इसके पूर्व यहां लोग लताओं , बेलाओं तथा पेड़ पौधों को पकड़ कर नीचे और ऊपर आया जाया करते थे। यह स्थान अपनी अमूल्य जड़ी- बूटियों के लिए विख्यात है।

पातालकोट की सबसे खास बात यह है कि जमीन से नीचे होने और सतपुड़ा की पहाडि़यों से घिरा होने से इसके काफी हिस्से में सूरज की रोशनी देर से पहुंचती है, वह भी इतनी कम कि दिन में भी रात नजर आती है। बारिश के समय बादल इस घाटी में एेसे दिखाई देते हैं जैसे तैर रहे हो। यदि कोई व्यक्ति यहां पहुंच जाए तो उसे लगेगा कि वह धरती के भीतर बसी अलग दुनिया में आ गया है।